Sasaram News : जिले के रोहतास प्रखंड स्थित रेहल पंचायत में सर्पदंश को लेकर फैली भ्रांतियों और अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया. जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, वन विभाग एवं फॉरेस्टसोल रिसर्च फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में ग्रामीणों को सर्पदंश की स्थिति में वैज्ञानिक तरीके से उपचार कराने और समय पर अस्पताल पहुंचने की जानकारी दी गयी.
सर्पदंश के बाद झाड़-फूंक से बचने की अपील
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एसपी जैन कॉलेज, सासाराम के प्राणीशास्त्र विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. गौरव कुमार ने सर्पदंश की स्थिति में अपनाये जाने वाले प्राथमिक उपायों की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि सर्पदंश के बाद झाड़-फूंक और अन्य पारंपरिक गलत उपचार के बजाय पीड़ित को बिना देर किये नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचाना चाहिए. उन्होंने विषैले और गैर-विषैले सर्पों के संबंध में भी ग्रामीणों को जानकारी दी. साथ ही लोगों से सर्पदंश के मामलों में घबराने के बजाय सही कदम उठाने की अपील की.
सर्पदंश से मृत्यु पर मिलने वाले मुआवजे की दी जानकारी
कार्यक्रम के दौरान सर्पदंश से मृत्यु की स्थिति में मिलने वाली मुआवजा राशि और उससे संबंधित प्रक्रिया की भी जानकारी ग्रामीणों को दी गयी. फॉरेस्टसोल रिसर्च फाउंडेशन की संस्थापक दीपा कुमारी ने कहा कि जागरूकता की कमी के कारण सर्पदंश के बाद लोग कई बार गलत उपचार का सहारा लेते हैं, जिससे जान का खतरा बढ़ जाता है. उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह के जागरूकता कार्यक्रमों को व्यापक स्तर पर आयोजित करने की आवश्यकता बतायी.
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नुक्कड़ नाटक के माध्यम से समझाया सही उपचार
कार्यक्रम में फॉरेस्टसोल रिसर्च फाउंडेशन के समन्वयक प्रियंशु प्रभाकर एवं स्वयंसेवकों ने सक्रिय भागीदारी निभायी. लोगों को जागरूक करने के लिए नुक्कड़ नाटक भी प्रस्तुत किया गया. इसके माध्यम से सर्पदंश के बाद होने वाली गलतियों और सही उपचार की प्रक्रिया को सरल तरीके से समझाया गया.
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जागरूकता अभियान में स्वयंसेवकों ने किया सहयोग
कार्यक्रम को सफल बनाने में लवली, रितु, अलीशा, रोहित, मनीष, तिलक, उदय एवं राहुल सहित अन्य लोगों ने सहयोग किया. कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीणों को संदेश दिया गया कि सर्पदंश की स्थिति में अंधविश्वास नहीं, बल्कि समय पर सही चिकित्सा उपचार ही जीवन बचाने का सबसे प्रभावी उपाय है.
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