रोहतास में धान की फसल पर कीटों का खतरा, वैज्ञानिक प्रबंधन से 20 से 40% तक नुकसान से बचाव संभव

धान की फसल को तना छेदक और अन्य कीटों से बचाने के लिए डॉ. आदित्य पटेल ने समेकित कीट प्रबंधन तकनीक अपनाने की सलाह दी है। जानें फसल सुरक्षा के प्रभावी तरीके।

Rohtas News : बिहार की प्रमुख खाद्यान्न फसल धान रोहतास जिले की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है. बड़े पैमाने पर धान की खेती होने के कारण रोहतास को ‘धान का कटोरा’ भी कहा जाता है. हालांकि हर वर्ष विभिन्न कीटों के प्रकोप से किसानों को फसल नुकसान का सामना करना पड़ता है. नारायण कृषि विज्ञान संस्थान, जमुहार के कीट विज्ञान विभाग के सहायक प्राचार्य डॉ. आदित्य पटेल ने किसानों से समय रहते कीटों की पहचान कर समेकित कीट प्रबंधन तकनीक अपनाने की अपील की है.

तना छेदक से फसल को सबसे ज्यादा खतरा

डॉ. पटेल ने बताया कि धान की फसल में तना छेदक प्रमुख कीटों में शामिल है. इसके प्रकोप से शुरुआती अवस्था में पौधों में ‘डेड हार्ट’ और बालियां निकलने के बाद ‘व्हाइट हेड’ के लक्षण दिखाई देते हैं. वहीं पत्ती लपेटक पत्तियों को लपेटकर अंदर से खाता है, जिससे पौधों की प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया प्रभावित होती है.

रस चूसक कीट भी पहुंचाते हैं भारी नुकसान

गंधी कीट, भूरा तना फुदका और गंधक फुदका जैसे रस चूसक कीट पौधों का रस चूसकर उनकी वृद्धि प्रभावित करते हैं. भूरा तना फुदका का प्रकोप अधिक होने पर पूरी फसल झुलस सकती है. वहीं गंधी कीट दूधिया दानों को नुकसान पहुंचाकर धान की गुणवत्ता और उत्पादन पर प्रतिकूल असर डालता है.

समेकित कीट प्रबंधन को बताया प्रभावी उपाय

डॉ. पटेल ने कहा कि फसल को कीटों से बचाने के लिए समेकित कीट प्रबंधन सबसे प्रभावी उपाय है. किसानों को समय पर बुआई, रोग एवं कीट प्रतिरोधी किस्मों का चयन, उचित दूरी पर रोपाई और खेत को खरपतवार मुक्त रखने पर ध्यान देना चाहिए. तना छेदक और पत्ती लपेटक के अंडों को नष्ट करने के साथ ट्राइकोग्रामा जैसे जैविक नियंत्रण उपाय और नीम आधारित कीटनाशियों का प्रयोग भी लाभकारी हो सकता है.

जरूरत के अनुसार करें कीटनाशियों का प्रयोग

उन्होंने बताया कि आवश्यकता पड़ने पर तना छेदक एवं पत्ती लपेटक के नियंत्रण के लिए फिप्रोनिल 0.3 प्रतिशत या कार्टाप हाइड्रोक्लोराइड का प्रयोग किया जा सकता है. गंधी कीट के नियंत्रण के लिए फिप्रोनिल या इमिडाक्लोप्रिड तथा भूरा तना फुदका के लिए इथोफेनप्रॉक्स या बुप्रोफेजिन का छिड़काव प्रभावी माना जाता है.

नियमित निगरानी से बच सकती है फसल

डॉ. पटेल ने किसानों से नियमित रूप से खेतों का निरीक्षण करने और कीटों के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर वैज्ञानिक सलाह के अनुसार प्रबंधन करने की अपील की. उन्होंने कहा कि समय पर कीटों की पहचान और उचित प्रबंधन अपनाकर धान की फसल में संभावित 20 से 40 प्रतिशत तक होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है.


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat khabar news desk

यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >