Sasaram News(संदेश जायसवाल): बिहार के रोहतास जिले के चेनारी स्थित गंगोत्री प्रोजेक्ट बालिका 10+2 विद्यालय को केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘पीएम श्री’ (PM SHRI) योजना में चयनित होने का गौरव तो प्राप्त हुआ है, लेकिन धरातल पर इस स्कूल की मौजूदा स्थिति सूबे की शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल रही है. विद्यालय में बुनियादी ढांचे की भारी कमी के कारण करीब 1500 छात्राओं का भविष्य महज आठ कमरों के भरोसे टिका हुआ है. जगह की इस कदर किल्लत है कि मजबूरी में कक्षा 6 से 8 तक की छात्राओं को दूसरे विद्यालय में शिफ्ट कर पढ़ाई करानी पड़ रही है.
भीषण गर्मी में दमघोंटू माहौल, एक ही कमरे में कई कक्षाएं चलाने की मजबूरी
विद्यालय परिसर में पर्याप्त कमरों का घोर अभाव होने के कारण छात्राओं को प्रतिदिन नारकीय परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है. पर्याप्त जगह न होने से कई बार अलग-अलग कक्षाओं की पढ़ाई एक साथ एक ही परिसर में संचालित करनी पड़ती है, जिससे न तो शिक्षिकाएं ढंग से पढ़ा पाती हैं और न ही छात्राएं एकाग्र हो पाती हैं. चालू मई महीने की इस भीषण और जानलेवा गर्मी में छोटे-छोटे कमरों के भीतर क्षमता से अधिक छात्राओं को ठूंसकर बैठाया जा रहा है, जिससे कई बच्चियों की तबीयत बिगड़ने का खतरा भी बना रहता है. नाराज अभिभावकों का कहना है कि सरकार को पीएम श्री जैसी वीआईपी योजना का तमगा देने से पहले स्कूल की बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त करना चाहिए था.
अपनी जमीन होने के बावजूद दूसरे स्कूल में शरण, ग्रामीणों में भारी आक्रोश
ग्रामीणों का सवाल: स्थानीय प्रबुद्ध नागरिक नागेंद्र गुप्ता, अशोक जायसवाल और कई समाजसेवियों ने शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि विद्यालय के पास अपनी पर्याप्त भूमि उपलब्ध है, इसके बावजूद चारदीवारी के भीतर नए भवन और अतिरिक्त कमरों का निर्माण अब तक क्यों नहीं कराया गया? अपनी जमीन होने के बाद भी हमारी बेटियों को दूसरे स्कूल में जाकर शरण लेनी पड़ रही है. ग्रामीणों ने इसे शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की घोर लापरवाही बताते हुए जल्द से जल्द नए भवन विस्तार की मांग की है.
बोले प्रधानाध्यापक: मामला न्यायालय में लंबित, वरीय अधिकारियों को दी गई है सूचना
इस पूरी बदहाली और तकनीकी पेंच को लेकर जब विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक संतोष राम से बात की गई, तो उन्होंने वस्तुस्थिति स्पष्ट की.
- बिल्डिंग निर्माण में बाधा: प्रभारी प्रधानाध्यापक ने बताया कि विद्यालय के पास अपनी जमीन तो मौजूद है, लेकिन उक्त भूमि का मामला फिलहाल न्यायालय (कोर्ट) में लंबित होने की वजह से उस जगह पर नया भवन या कमरों का निर्माण कार्य शुरू नहीं कराया जा पा रहा है.
- प्रशासन को पत्राचार: उन्होंने बताया कि छात्राओं की लगातार बढ़ती संख्या और कमरों की किल्लत से उत्पन्न होने वाली हर समस्या से जिले के वरीय प्रशासनिक अधिकारियों को लिखित पत्राचार के माध्यम से पूर्व में ही अवगत करा दिया गया है.
- वैकल्पिक प्रस्ताव: इसके साथ ही विभाग को अतिरिक्त कमरों के निर्माण के लिए एक वैकल्पिक प्रस्ताव भी भेजा गया है, जिसकी स्वीकृति मिलते ही आगे का कार्य शुरू कराया जाएगा. हालांकि, जब तक कानूनी और प्रशासनिक बाधाएं दूर नहीं होतीं, तब तक छात्राओं को इन सीमित और बदहाल संसाधनों के बीच ही पढ़ने को मजबूर होना पड़ेगा.
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