शहीद दिवस पर निकला जुलूस, भगत सिंह के सपनों का भारत बनाने का लिया संकल्प

SASARAM NEWS.सोमवार को भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव का 96वां शहादत दिवस साम्राज्यवाद विरोधी दिवस के रूप में मनाया गया. इस मौके पर एनबीएस के नेताओं ने शहर में जुलूस निकाला.

साम्राज्यवाद विरोधी दिवस के रूप में मना भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव का 96वां शहादत दिवस फोटो-5- शहर में रैली निकालते नौजवान भारत सभा के सदस्य प्रतिनिधि, सासाराम सदर सोमवार को भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव का 96वां शहादत दिवस साम्राज्यवाद विरोधी दिवस के रूप में मनाया गया. इस मौके पर एनबीएस के नेताओं ने शहर में जुलूस निकाला. जुलूस रेलवे मैदान से शुरू होकर धर्मशाला, गांधी चौक, पोस्ट ऑफिस चौक, कचहरी मोड़, करगहर मोड़ और कलेक्ट्रेट होते हुए शहीद भगत सिंह के स्मारक स्थल पर पहुंचा. वहां नेताओं ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और उनके सपनों का भारत बनाने का संकल्प लिया. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संरक्षक संजय वैश्य ‘समाजवादी’ ने कहा कि 23 मार्च 1931 को हमारे क्रांतिकारियों ने हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूम लिया, ताकि देश को न केवल राजनीतिक स्वतंत्रता मिले, बल्कि आर्थिक गुलामी से भी मुक्ति मिल सके. उन्होंने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में बढ़ते अमेरिकी हस्तक्षेप और आर्थिक दबावों पर चिंता जतायी.उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा, “जब इश्क और क्रांति का अंजाम एक ही है, तो रांझा बनने से बेहतर है कि भगत सिंह बन जाओ.”संयोजक संजय क्रांति ने कहा कि भगत सिंह के अनुसार स्वतंत्रता का अर्थ केवल अंग्रेजों से मुक्ति नहीं, बल्कि समाज में असमानता, अन्याय और शोषण से आजादी भी है. उन्होंने युवाओं से भगत सिंह के अधूरे सपनों को साकार करने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया.अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा के जिला कार्यकारी अध्यक्ष सुनील कुमार वर्मा ने कहा कि भगत सिंह ने फांसी के फंदे से साम्राज्यवाद के नाश का नारा दिया था, लेकिन वर्तमान में अमेरिकी साम्राज्यवाद विश्व शांति के लिए खतरा बनकर उभरा है. इसके कारण भारत सहित कई देशों पर आर्थिक और रणनीतिक दबाव बढ़ा है.एआइकेएमएस के अध्यक्ष राजेश पासवान ने कहा कि क्रांति का अर्थ केवल हिंसा नहीं, बल्कि समाज से असमानता, शोषण और अन्याय का अंत करना है.

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Author: ANURAG SHARAN

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