Sasaram News : सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं से वंचित हो रहे लोग, आय प्रमाणपत्र बन रहा बाधक

जिले में सामाजिक सुरक्षा पेंशन का लाभ कई जरूरतमंदों को नहीं मिल रहा है. इसकी एक वजह आय प्रमाणपत्र भी है.

सासाराम नगर. जिले में सामाजिक सुरक्षा पेंशन का लाभ कई जरूरतमंदों को नहीं मिल रहा है. इसकी एक वजह आय प्रमाणपत्र भी है. कार्यालय में बैठकर राजस्व कर्मचारी और सीओ इन पेंशन के हकदारों का आय स्वघोषणा से दोगुना बना रहे हैं, जिससे इन योजनाओं का लाभ लेने से कई वंचित हो जा रहे हैं. विधवा पेंशन, विवाह योजना, प्रोत्साहन योजना और लघु उद्यमी योजना जैसी सरकार महत्वकांक्षी योजनाओं का लाभ बहुत ही कम लोगों को मिल पा रहा है. क्योंकि इन योजनाओं का लाभ लेनेवाले लाभुकों को 60000 रुपये से कम के आय प्रमाणपत्र की जरूरत पड़ती है, जो अंचल कार्यालय से अब बनाना मुश्किल हो गया है. ऑनलाइन तो बनेगा ही नहीं, जबतक कार्यालय व्यक्ति नहीं जायेगा. मंगलवार को समाज कल्याण, अनुसूचित जाति जनजाति कल्याण विभाग व पिछड़ा अति पिछड़ा कल्याण विभाग, मद्यनिषेध व निबंधन विभाग के कार्यों की मुख्य सचिव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा की. इस समीक्षा बैठक में डीएम उदिता सिंह, जिला कल्याण पदाधिकारी, जिला अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी, सहायक आयुक्त, मद्य व निषेध, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी आइसीडीएस, जिला योजना पदाधिकारी सह सहायक निदेशक सामाजिक सुरक्षा कोषांग सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे. इन विभागों के कार्यों का पहले से ही पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन (पीपीटी) तैयार किया गया था, जिसके अनुपालन बिंदु की समीक्षा की गयी. समाज कल्याण विभाग की समीक्षा के दौरान बताया गया कि जिले में 45000 के समकक्ष दिव्यांगजन पंजीकृत हैं, जिन्हें विभिन्न प्रकार के निःशक्तता पेंशन का लाभ प्रदान किया जा रहा है. इस पर डीएम ने बताया कि जिले में दिव्यांगजनों की आबादी 45000 से ज्यादा हो सकती है. इस संबंध में सहायक निदेशक, दिव्यांगजन को निदेशित किया गया कि सभी 19 प्रखंडों में प्रखंड विकास पदाधिकारी से समन्वय स्थापित कर समेकित प्रतिवेदन उपलब्ध कराया जाये. ताकि सभी दिव्यांजनों को योजनाओं से लाभांवित किया जा सके. साथ ही विधानसभा निर्वाचन में सभी दिव्यांगजन मतदाताओं को चिह्नित करते हुए मतदान प्रक्रिया में उन्हें सुविधा उपलब्ध करायी जायेगी. इसके अलावा सहायक निदेशक सामाजिक सुरक्षा कोषांग ने बताया कि जिले में सभी योग्य लाभुकों को विभिन्न पेंशन का लाभ प्रदान किया जा रहा है. हालांकि, वह इसका लक्ष्य निर्धारण के बारे में नहीं बताये. जब उनसे पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि विभाग स्तर से विभिन्न प्रकार के पेंशन योजना में लाभ प्रदान करने के लिए लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके लिए सभी प्रखंड कार्यालय से प्रतिवेदन की मांग की गयी है. इस संबंध में डीएम ने दो दिनों के अंदर सभी प्रकार के पेंशन योजना के लाभ देने के लिए दिये गये लक्ष्य व उनके प्राप्ति से संबंधित अद्यतन प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है. साथ ही यह भी हिदायत दी है कि इसमें किसी प्रकार की लापरवाही अवांछनीय मानी जायेगी. दो छात्रावास के लिए नहीं मिल रही जमीन— जिले में अनुसूचित जाति जनजाति कल्याण विभाग व पिछड़ा अति पिछड़ा कल्याण विभाग की ओर से एससी एसटी तीन छात्रावास का निर्माण कराना था. लेकिन, इनमें से अबतक एक छात्रावास के निर्माण के लिए भूमि चिह्नित कर निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा गया है. जबकि, दो छात्रावासों के लिए अबतक इस विभाग को भूमि उपलब्ध नहीं हो पायी है. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आवासीय बालक उच्च विद्यालय, रामेश्वरगंज और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आवासीय मध्य विद्यालय बुधुआ के निर्माण के लिए भूमि चिह्नित नहीं पायी है. इसको लेकर डीएम ने दोनों जगह उक्त भवन निर्माण के प्रस्ताव संबंधित अंचलाधिकारी से समन्वय स्थापित करते हुए विभाग को भेजने की कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है. इसके अलावा जिले में 96 सामुदायिक भवन सह वर्कशेड निर्माण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था. लेकिन, इनमें 30 का निर्माण नहीं हुआ है. विभाग की ओर से समीक्षा बैठक में 66 पूर्ण कराने की बात कही गयी है. 53 वाहनों की नीलामी की कार्रवाई पूरी- मद्यनिषेध व निबंधन विभाग की समीक्षा में सहायक आयुक्त ने बताया कि जिले में अब तक 8000 लीटर से अधिक शराब का विनष्टीकरण किया गया है. वाहनों के अधिहरण से संबंधित नीलामी के संबंध में बताया कि जिले में लंबित 194 वाहनों में से 53 की नीलामी की प्रक्रिया पूर्ण हो गयी है और शेष के संबंध में आवश्यक कार्रवाई की जा रही है. साथ ही डॉ आंबेडकर समग्र सेवा अभियान की भी समीक्षा की गयी, जिसमें जिला कल्याण पदाधिकारी ने बताया कि इस अभियान के तहत कुल 22 प्रकार के सेवाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है. लक्ष्य को जल्द से जल्द हासिल करने को लेकर डीएम ने संबंधित विभाग के अधिकारी को एक सप्ताह का समय दिया है, जिसमें उन्होंने अन्य विभागों से समन्वय स्थापित करने और इसका डाटा विभागीय पोर्टल पर अपडेट करने का निर्देश दिया है.

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