Rohtas Fake Nursing Homes Exposed : रोहतास जिले के नोखा प्रखंड में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां इलाज के नाम पर अवैध नर्सिंग होमों का धंधा खुलेआम चल रहा है. हैरानी की बात यह है कि प्रखंड में 14 से अधिक निजी नर्सिंग होम संचालित हैं, लेकिन इनमें से केवल दो के पास ही स्वास्थ्य विभाग का वैध लाइसेंस है. इसके बावजूद बाकी संस्थान बिना किसी डर के मरीजों का इलाज कर रहे हैं.
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन नर्सिंग होमों में न तो जरूरी सुविधाएं हैं और न ही तय मानकों का पालन किया जाता है. फिर भी यहां गंभीर मरीजों का इलाज किया जा रहा है, जिससे उनकी जान जोखिम में पड़ रही है. लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है.
नाम बड़े, दर्शन छोटे, डॉक्टर के नाम पर धोखा
नोखा नगर और आसपास के इलाकों में कई ऐसे नर्सिंग होम हैं, जहां बड़े-बड़े डॉक्टरों के नाम के बोर्ड लगे हैं. लेकिन हकीकत यह है कि वहां इलाज प्रशिक्षित विशेषज्ञों की जगह अन्य कर्मियों द्वारा किया जाता है. इससे मरीजों को सही इलाज नहीं मिल पाता और स्थिति बिगड़ने का खतरा बना रहता है.
लोगों का आरोप है कि यह सब खुलेआम हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग की ओर से निगरानी और कार्रवाई की कमी साफ नजर आती है.
Sasaram News : मरीजों से मनमानी वसूली का आरोप
इन नर्सिंग होमों पर इलाज के नाम पर मनमानी रकम वसूलने का भी आरोप है. शिवपुर निवासी महेंद्र चौधरी ने बताया कि उन्होंने अपनी पत्नी की डिलीवरी के लिए एक निजी क्लिनिक में भर्ती कराया था. सिजेरियन ऑपरेशन के बाद उनसे दवा और इलाज के नाम पर 20 हजार रुपये से अधिक वसूले गए.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें खर्च का कोई स्पष्ट ब्योरा नहीं दिया गया. ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं, जहां मरीजों और उनके परिजनों को आर्थिक रूप से भी परेशान किया जा रहा है.
संसाधनों की कमी के बावजूद इलाज
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई नर्सिंग होमों में बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं. न तो पर्याप्त उपकरण हैं और न ही आपातकालीन स्थिति से निपटने की व्यवस्था. इसके बावजूद यहां गंभीर मरीजों का इलाज किया जा रहा है.
पिछले कुछ वर्षों में इलाज में लापरवाही के कई मामले भी चर्चा में रहे हैं, जिससे लोगों का भरोसा डगमगाने लगा है. इसके बावजूद प्रशासन की चुप्पी लोगों को और ज्यादा चिंतित कर रही है.
स्वास्थ्य विभाग ने क्या कहा
इस मामले पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, नोखा के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अजय प्रताप ने साफ कहा कि प्रखंड में केवल दो नर्सिंग होम ही लाइसेंसधारी हैं. उन्होंने बताया कि यदि कहीं अवैध तरीके से नर्सिंग होम संचालित किए जा रहे हैं, तो उनकी जांच की जाएगी.
उन्होंने यह भी कहा कि जांच के बाद रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी और नियमों के अनुसार कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी.
कार्रवाई कब होगी, लोगों को इंतजार
नोखा में तेजी से फैल रहे फर्जी नर्सिंग होमों के इस नेटवर्क ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस मामले में कब तक सख्त कदम उठाता है.
