रोहतास में JCB से सड़क काटकर डाला नाला, 20 हजार लोगों का आवागमन प्रभावित; दो किमी की दूरी अब 15 किमी में हो रही पूरी

जोरावरपुर भाया बाराडीह गोड़ारी लिंक पथ को किसानों ने जेसीबी से काटकर बाधित कर दिया है, जिससे 20 हजार की आबादी प्रभावित है और स्कूली बच्चों को भारी परेशानी हो रही है।

Rohtas News : बिक्रमगंज-नासरीगंज एनएच-120 पथ से जुड़े जोरावरपुर भाया बाराडीह-गोड़ारी लिंक पथ को जोरावरपुर पुल से महज 200 मीटर की दूरी पर जेसीबी से काटकर आवागमन बाधित कर दिया गया है. सड़क काटे जाने के बाद मौके पर दलदली मिट्टी की स्थिति बन गयी है, जिससे लोगों को आवागमन में भारी परेशानी हो रही है. स्थिति यह है कि चार पहिया वाहन सड़क पार नहीं कर पा रहे हैं, जबकि दो पहिया वाहन चालकों को भी इस रास्ते से गुजरने में काफी मुश्किल हो रही है.

सड़क कटने से स्कूल जाने वाले बच्चों की बढ़ी परेशानी

सड़क की खराब स्थिति का सबसे अधिक असर स्कूली बच्चों और ग्रामीणों पर पड़ रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर दलदल होने के कारण बच्चे समय पर स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं. बाराडीह, विशुनपुर, श्रीरामपुर और सुकहराडिहरी समेत कई गांवों के लिए यह सड़क लाइफलाइन मानी जाती है. करीब 20 हजार की आबादी इस मार्ग से आवागमन करती है.

पटवन के लिए किसानों ने काटी सड़क, नाला डालने के बाद बढ़ी समस्या

बताया जाता है कि खेतों में पटवन की समस्या के कारण किसानों ने सड़क को जेसीबी से काटकर नाला डाल दिया. नाला डालने के बाद सड़क के कटे हिस्से पर ईंट के टुकड़े या राबिस नहीं डाला गया. इसके कारण वहां दलदली मिट्टी की स्थिति बन गयी है. बाद में कच्ची मिट्टी डालकर सड़क को बराबर करने का प्रयास किया गया, लेकिन कच्ची मिट्टी में वाहनों के पहिये धंस जा रहे हैं.

सड़क कटने से दो किमी की दूरी हुई 15 से 20 किमी

ग्रामीणों के अनुसार सड़क के इस हिस्से से आवागमन बाधित होने के कारण करीब दो किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए लोगों को अब 15 से 20 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ रहा है. इससे ग्रामीणों को समय और ईंधन दोनों की अतिरिक्त खपत करनी पड़ रही है. ग्रामीणों का कहना है कि बिक्रमगंज-नासरीगंज एनएच-120 और जोरावरपुर से गोड़ारी के बीच जाम की स्थिति उत्पन्न होने पर इसी लिंक पथ का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे में सड़क बाधित होने से वैकल्पिक मार्ग भी प्रभावित हुआ है.

निर्माण के दौरान नाला नहीं डालने का किसानों ने लगाया आरोप

किसानों का आरोप है कि जब पक्की सड़क का निर्माण हो रहा था, उस समय नाला नहीं डाला गया. पुराने नाले के ऊपर ही सड़क का निर्माण कर दिया गया. सड़क निर्माण के एक साल भी पूरे नहीं हुए कि नाला क्षतिग्रस्त हो गया और सड़क धंस गयी. इससे नाले से खेतों तक पटवन के पानी की निकासी बंद हो गयी. किसानों का कहना है कि पानी की निकासी की समस्या के कारण मजबूरी में सड़क काटकर नाला डालना पड़ा.

ईंट या राबिस डालकर रास्ता चालू करने की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि किसानों ने पटवन के लिए सड़क काटकर नाला डाला, लेकिन कटे हुए हिस्से को ईंट के टुकड़ों या चिमनी भट्ठे के राबिस से भर दिया जाता तो दलदल की समस्या नहीं होती. लोगों ने किसानों से अपील की है कि सड़क के कटे हिस्से में ईंट के टुकड़े या राबिस डालकर उसे आवागमन के लायक बनाया जाए, ताकि लोगों को पहले की तरह आवागमन की सुविधा मिल सके.

प्रखंड प्रमुख प्रतिनिधि ने भी माना, मिट्टी-राबिस डालना जरूरी था

पथ काटे जाने की शिकायत प्रखंड प्रमुख प्रतिनिधि राम नारायण पासवान से की गयी. उन्होंने कहा कि किसानों द्वारा पटवन के लिए नाला डालने के लिए सड़क काटना अपनी जगह है, लेकिन कटे हुए हिस्से में मिट्टी या राबिस डाल दिया जाता तो लोगों को इस तरह की परेशानी नहीं उठानी पड़ती.

थानाध्यक्ष ने कहा, मनमानी करने वालों पर होगी कार्रवाई

स्कूल जाने वाले छात्रों के अभिभावकों ने सड़क काटकर आवागमन बाधित करने की शिकायत थानाध्यक्ष विवेक कुमार से भी की. थानाध्यक्ष ने कहा कि मामले की सूचना पथ निर्माण विभाग को दी जानी चाहिए. यदि विभाग की ओर से कार्रवाई नहीं की जाती है तो पुलिस स्तर से कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि बिना किसी से सलाह लिए या शिकायत किए मनमाने ढंग से सड़क काटकर आवागमन बाधित किया गया है तो ऐसे लोगों को चिन्हित कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

पथ की हालत कैसे बाइक पार करते लोग दलदली पथ से बढ़ी परेशानी | Prabhat Khabar Network


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By Ashok kr singh

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