Sasaram News : (आमोद सिंह) जिले में रसोई गैस के बाद अब पेट्रोल और डीजल का संकट भी गहराने लगा है. जिले के कई पेट्रोल पंपों पर पिछले कई दिनों से डीजल समाप्त है, जबकि कुछ पंपों पर पेट्रोल भी नहीं मिल रहा है. पंप संचालकों ने “डीजल नहीं है” का बोर्ड लगाकर ग्राहकों को सूचना दे रखी है. खासकर हाईवे किनारे स्थित पेट्रोल पंपों की स्थिति सबसे अधिक खराब बतायी जा रही है.
500 रुपये का पेट्रोल और 2000 का डीजल देने का निर्देश
इसी बीच जिला प्रशासन ने अघोषित रूप से पेट्रोल पंप संचालकों के लिए ईंधन बिक्री की सीमा तय कर दी है. जानकारी के अनुसार एक वाहन में अधिकतम 500 रुपये का पेट्रोल और 2000 रुपये का डीजल देने का निर्देश दिया गया है. इसका सबसे ज्यादा असर मालवाहक ट्रकों और बसों पर पड़ रहा है. लंबी दूरी तय करने वाले वाहन चालक अब एक बार में टैंक फुल नहीं करा पा रहे हैं, जिससे उन्हें बार-बार ईंधन भरवाने के लिए रुकना पड़ रहा है.
सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक ही चल रहे पंप
एक पेट्रोल पंप प्रबंधक ने बताया कि संकट से पहले सप्ताह में दो बार 20 हजार लीटर ईंधन का टैंकर पहुंचता था, लेकिन अब सप्ताह में सिर्फ एक बार 10 हजार लीटर ईंधन ही मिल रहा है. आपूर्ति कम होने के कारण कई पंप रात में बंद रखने पड़ रहे हैं. फिलहाल सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक ही संचालन हो रहा है. प्रशासन द्वारा रिजर्व स्टॉक रखने के निर्देश के बाद स्थिति और गंभीर हो गयी है.इधर मंगलवार से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी गयी है, जिससे आम लोगों की परेशानी और बढ़ गयी है.
133 पेट्रोल पंपों पर असर, कर्मचारियों की छंटनी शुरू
जिले में कुल 133 पेट्रोल पंप संचालित हैं. इनमें Indian Oil Corporation के 65, Hindustan Petroleum के 36 और Bharat Petroleum के 32 पंप शामिल हैं. जरूरत के मुताबिक ईंधन नहीं मिलने से कई पंप बंद हो चुके हैं, जबकि कुछ संचालक कर्मचारियों की छंटनी कर सीमित संसाधनों में पंप चला रहे हैं. हाईवे के अधिकतर पंप रात में बंद रखे जा रहे हैं और नाइट ड्यूटी में तैनात नोजलमैन को हटाया जा रहा है. यदि यही स्थिति बनी रही, तो कई कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है.
खेती पर भी मंडराने लगा संकट
मॉनसून की दस्तक से किसान जहां धान की खेती की तैयारी में जुटने लगे हैं, वहीं डीजल संकट ने उनकी चिंता बढ़ा दी है. जून महीने से खेतों की जुताई और बुआई का काम तेज हो जाता है. अब खेती पूरी तरह ट्रैक्टरों पर निर्भर है और डीजल की कमी होने पर समय पर जुताई प्रभावित हो सकती है. किसानों का कहना है कि यदि जल्द ईंधन आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो इसका सीधा असर खेती और उत्पादन पर पड़ेगा.
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