Rohtas News : प्रस्तावित बिहार विश्वविद्यालय विधेयक-2026 के विभिन्न प्रावधानों के विरोध में वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा के अतिथि प्राध्यापक 10 अगस्त को काला बिल्ला लगाकर शैक्षणिक एवं नियमित कार्य करेंगे. अतिथि प्राध्यापक संघ के अध्यक्ष डॉ. आदित्य कुमार आनंद ने कहा कि प्रस्तावित विधेयक से विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और शिक्षकों के हित प्रभावित होने की आशंका है. इसी के विरोध में शांतिपूर्ण तरीके से काला बिल्ला लगाकर सरकार तक अपनी आपत्ति पहुंचायी जायेगी.
काला बिल्ला लगाकर पढ़ायेंगे अतिथि प्राध्यापक
डॉ. आदित्य कुमार आनंद ने बताया कि 10 अगस्त को संघ से जुड़े अतिथि प्राध्यापक विश्वविद्यालय और संबद्ध कॉलेजों में काला बिल्ला लगाकर कक्षाएं लेंगे. इसके साथ ही अपने सभी नियमित शैक्षणिक कार्य भी करते रहेंगे.
उन्होंने स्पष्ट किया कि विरोध का उद्देश्य शैक्षणिक कार्य को बाधित करना नहीं है. शिक्षक अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए सरकार का ध्यान प्रस्तावित विधेयक को लेकर अपनी मांगों और आपत्तियों की ओर आकर्षित करेंगे.
स्वायत्तता से जुड़े प्रावधानों पर जतायी चिंता
संघ अध्यक्ष ने कहा कि प्रस्तावित विधेयक में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की स्वायत्तता से जुड़े प्रावधानों को लेकर शिक्षकों में चिंता है. उच्च शिक्षा व्यवस्था में विश्वविद्यालयों की अकादमिक स्वतंत्रता बनाए रखना जरूरी है.
उन्होंने कहा कि शिक्षकों और शिक्षण संस्थानों को स्वतंत्र वातावरण मिलने पर ही बेहतर शैक्षणिक कार्य संभव है. इसलिए विधेयक के प्रावधानों पर सभी संबंधित पक्षों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया जाना चाहिए.
सरकार से व्यापक विचार-विमर्श की मांग
डॉ. आनंद ने सरकार से मांग की कि प्रस्तावित विधेयक के प्रावधानों पर विश्वविद्यालयों के शिक्षकों, कर्मचारियों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ व्यापक चर्चा की जाये. उन्होंने कहा कि सभी पक्षों की राय को ध्यान में रखकर ही आगे की प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए.
मांगों पर पहल नहीं हुई तो बढ़ेगा आंदोलन
संघ अध्यक्ष ने कहा कि यदि शिक्षकों की मांगों और आपत्तियों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो आगे आंदोलन को और व्यापक किया जा सकता है. उन्होंने सभी अतिथि प्राध्यापकों से 10 अगस्त के कार्यक्रम में एकजुट होकर शामिल होने की अपील की.
उन्होंने कहा कि काला बिल्ला लगाकर शैक्षणिक कार्य करना लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने का माध्यम है. शिक्षक अपनी जिम्मेदारियां निभाते हुए अपनी बात सरकार तक पहुंचायेंगे.
