फोटो कैप्शन: हनुमान मंदिर प्रांगण में रामचरित्र का व्याख्यान करतीं विदुषी शैल प्रिया पांडे़ प्रतिनिधि, डालमियानगर रत्तु बिगहा स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर में आयोजित 72वें हनुमान चालीसा ज्ञान यज्ञ के छठवें दिन शनिवार को मानस विदुषी शैल प्रिया पांडे ने राम जन्म प्रसंग पर चर्चा की. उन्होंने बताया कि श्रद्धा व विश्वास के साथ पूजा करने वाले का कभी अहित नहीं होता है और भगवान स्वयं रूप बदलकर उनकी रक्षा करते हैं. विदुषी की वाणी सुनकर श्रोता भाव-विभोर हो उठे. कथावाचक ने कहा कि जब-जब धरा पर अधर्म बढ़ता है, तब धर्म की स्थापना के लिए भगवान विभिन्न रूपों में जन्म लेते हैं. मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का जन्म इक्ष्वाकु वंश में हुआ था. उन्होंने अधर्मी रावण का अंत कर पृथ्वी पर धर्म की स्थापना की थी. विदुषी ने बताया कि भगवान को पुत्र रूप में पाने के लिए माता कौशल्या ने 23 हजार वर्षों तक तपस्या की थी. श्रीराम के चतुर्भुज रूप में अवतार लेते ही संपूर्ण अयोध्या नगरी में शुभ संकेत मिलने लगे थे और चारों ओर सुख-शांति व हर्ष का माहौल व्याप्त हो गया था. भगवान की मनमोहक छवि के दर्शन के लिए देवता भी रूप बदलकर अयोध्या आये थे. इस अवसर पर हनुमान मंदिर के पुजारी रामानुज तिवारी, बृजमोहन सिंह, राजेश प्रसाद केसरी, नीलम देवी, माधुरी पाठक, लक्ष्मण पाठक, विनोद कसेरा, नरेंद्र सिंह, अरुण कुमार, उषा कुमारी, शांति देवी, चैतन्य दास, शैलेंद्र प्रसाद, कमलेश पांडे और मानसिंह समेत सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित थे.
श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा करने वाले का कभी अहित नहीं होता : शैल प्रिया पांडे
हनुमान चालीसा ज्ञान यज्ञ के छठवें दिन राम जन्म प्रसंग पर की चर्चा
