sasaram News : पीएम मोदी के पिटारे से निकलेगी रेल कारखाना की सौगात या मिलेगी मयूसी

2015 में सुअरा हवाई अड्डे में आयोजित चुनावी कार्यक्रम में पीएम ने की थी घोषणा

तारिक महमूद, डेहरी

बिक्रमगंज में शुक्रवार को पीएम मोदी के दौरे को लेकर जिलेवसियों को बेसब्री से इंतजार है. पीएम के दौरे को लेकर सबसे अधिक चर्चा डालमियानगर रेल कारखाने को लेकर हैं. ऐसे में कयास लगाया जा रहा है कि पीएम मोदी अपने पिटारे से रेल कारखाना की सौगात दे सकते हैं. 2015 विधानसभा चुनाव से पहले भी पीएम मोदी ने सुअरा हवाई अड्डे से डालमियानगर रेल कारखाना खोलने की बात की थी. अब 10 साल बाद वे अपने कही गयी बात को पूरा करेंगे या फिर से डालमियानगर रेल कारखाना चुनवी मुद्दा बन कर रह जायेगा. इसका पूरे जिलेवासियों को इंतजार है. इस बात पर अब तक संस्पेंस बरकरार है. हालांकि, उनके पूर्व से तय कार्यक्रम में डालियानगर रेल कारखाने का कोई जिक्र नही है. ऐसे में पीएम रेल कारखाना खोलने को लेकर कोई घोषणा करेंगे या नहीं, ये तो शुक्रवार को सभा के बाद ही पता चल पायेगा. हालांकि, पीएम के कार्यक्रम से पूर्व तैयारियों को लेकर पहुंचने वाले नेता को स्थानीय लोगों व जनप्रतिनिधियों के माध्यम से रेल कारखाना खोलने को लेकर मांग की जा रही है.

इनसेटस्थानीय जनप्रतिनिधि पीएम के सामने उठायेंगें रेल कारखाना का मुद्दाउम्मीद लगायी जा रही है कि पीएम की सभा के दौरान जिन जनप्रतिनिधियों को संबोधन करने का मौका मिलेगा. वे डालमियानगर रेल कारखाना का मुद्दा उठायेंगे. ऐसे में देखना होगा कि उनके द्वारा उठाये गये मुद्दे पर पीएम खामोश रहते हैं या फिर कोई घोषण करते हैं. बताया जाता है कि 2024 में पीएम मोदी की जनसभा के दौरान भी डालमियानगर रेल कारखाने को खोलने को लेकर घोषणा करने की उम्मीद जतायी जा रही थी. लेकिन, पीएम ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध ली थी. हालांकि, लोगों की मांग को देखते हुए काराकाट से एनडीए के प्रत्याशी रहे उपेंद्र कुशवाहा ने मंच से कहा था कि चुनाव परिणाम के बाद रेल कारखाने को लेकर कार्रवाई की जायेगी. लेकिन, पीएम के मुख से इस पर चुप्पी साधने से लोगों को मायूसी हाथ लगी थी.

इनसेट41 वर्षों से चुनावी मुद्दा बन कर रह गया है डालमियानग उद्योग पुंजडालमियानगर रेल कारखाना चुनावी मुद्दा बन कर रह गया है. जब भी लोक सभा या विधानसभा चुनाव आता है, तो नेताओं को डालमियानगर रेल कारखाने की याद आती है. फैक्ट्री में ताला लगने के बाद अब तक 10 लोकसभा चुनाव हो चुके हैं. लेकिन, उम्मीद के सिवा यहां की जनाता को कुछ नहीं मिला है. कई लोगों की आंखें डालमियानगर उद्योग पुंज की चीमनियों से धुंआं निकलने के इंतजार में पथरा गयी है. अब विधानसभा चुनाव होने वाला है. ऐसे में एक बार डालमियानगर रेल कारखाना चुनावी मुद्दा बन सकता है.

1984 में फैक्ट्री में लगा था ताला1984 में जब फैक्ट्री में ताला लगा था. उस समय केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी. उसके बाद से कई सरकारें आयीं और गयीं. लेकिन, डालमियानगर उद्योग को लेकर कोई सार्थक पहल नहीं हो सकी. हालांकि, 2007 में तत्कालीन रेलमंत्री लालू प्रसाद ने यहां रेलवे कारखान खोलने के लिए पहल की थी. कोर्ट से रेलवे ने डालमियानगर उद्योग पूंज को 140 करोड़ रुपये में क्रय किया था. 2009 में रेलवे कारखाना का शिलान्यास तत्कालीन यूपीए अध्यक्षा सोनिया गांधी के हाथों हुआ था. लेकिन, 2009 में हुए लोकसभा चुनाव के बाद रेल मंत्रालय ममता बनर्जी के पास चला गया और ये मामला ठंडा पड़ गया. हालांकि यूपीए द्वितीय के कार्यकाल में लोकसभा अध्यक्ष के पद पर मीरा कुमार थीं. चूंकि ये कारखाना इसी जिला में आता है. लेकिन, मीरा कुमार के लोकसभा क्षेत्र में नहीं आने के कारण उन्होंने भी ध्यान नहीं दिया.

इनसेटक्या हुआ तेरा वादा : 2015 में पीएम ने की थी घोषणापिछले 11 वर्षों से केंद्र में बीजेपी व राज्य में बीजेपी समर्थित जदयू की सरकार है. एक तरफ मोदी है, तो मुमकीन है का नारा लग रहा है. वहीं, दूसरी ओर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विकास पुरुष के नाम से जाने जाते हैं. इसके बावजूद 11 वर्षों में भी कोई सार्थक पहल नहीं हो सकी है. 2015 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव प्रचार करने यहां पहुंचे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी चुनावी मंच से रेल कारखाना खोलने की बात कर चुके हैं. लेकिन, उनके द्वारा किया गया वादा 11 वर्षों में भी नहीं पूरा हुआ है. अब जबकि शुक्रवार को मोदी बिक्रमगंज आ रहे है. ऐसे में लोगों की उम्मीद परवान चढ़ने लगी है.

1933 में रखी गयी थी डालमियानगर इंडस्ट्रीज की नींवडालमियानगर इंडस्ट्रीज की नींव रामकृष्ण डालमिया ने 1933 में रखी थी. धीरे-धीरे यह उद्योग पूंज एशिया का सबसे बड़े उद्यौगिक परिसर में बदल गया. 15 मई 1933 को चीनी मिल के लिए सर सुल्तान अहमद द्वारा नींव का पत्थर रखा गया था. वर्ष 1937 में बिहार के तत्कालीन गवर्नर सर मॉरिस हैलेट ने प्रतिदिन 500 टन की क्षमता वाले सीमेंट फैक्ट्री का नींव रखा था. मार्च 1938 में स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने इस सीमेंट कारखाना का उद्घाटन किया था.

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Published by: Panchdev kumar

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