Sasaram News : सिविल सर्जन मणीराज रंजन की पहल के बावजूद सीएचसी करगहर में चिकित्सकीय व्यवस्था से लेकर प्रशासनिक कार्य तक की स्थिति में सुधार नहीं हुआ है. अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्था को लेकर करीब डेढ़ माह पूर्व सिविल सर्जन ने आमजनों की शिकायत पर सीएचसी का औचक निरीक्षण किया था. निरीक्षण के बाद उन्होंने कई गंभीर खामियां सामने आने की बात कही थी. बावजूद इसके अब तक स्थिति यथावत बनी हुई है.
निरीक्षण में आमजनों की शिकायतें सही पायी गयी थीं
औचक निरीक्षण के बाद सिविल सर्जन मणीराज रंजन ने बताया था कि आमजनों की ओर से की गयी शिकायतें सही व सत्य पायी गयीं. उन्होंने अस्पताल में व्याप्त कुव्यवस्था के लिए पदस्थापित चिकित्सकों और कर्मियों को जिम्मेदार माना था. उनका कहना था कि चिकित्सक और कर्मी अपने दायित्वों का सही तरीके से अनुपालन नहीं कर रहे हैं.
समय पर अस्पताल नहीं पहुंचते कर्मी और चिकित्सक
सिविल सर्जन ने निरीक्षण के दौरान कहा था कि बिजली कटने के बाद अस्पताल में पावर सप्लाई के लिए लगाये गये जनरेटर की क्षमता इतनी है कि उससे एक्स-रे का कार्य किया जा सकता है. इसके बावजूद बिजली व्यवस्था को लेकर परेशानी बनी हुई है. उन्होंने यह भी कहा था कि अस्पताल में कोई भी कर्मी समय पर नहीं आता है. चिकित्सकों की उपस्थिति को लेकर भी उन्होंने ऐसी ही स्थिति की बात कही थी.
पैथोलॉजी जांच व्यवस्था को बताया था सबसे दयनीय
निरीक्षण के दौरान पैथोलॉजी की व्यवस्था को लेकर भी सिविल सर्जन ने नाराजगी जतायी थी. उन्होंने कहा था कि मरीजों की सही तरीके से जांच नहीं की जाती है. अस्पताल में प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं को आशा और एएनएम की मिलीभगत से निजी क्लीनिकों में भेजे जाने की शिकायत भी सामने आयी थी.
छोटी समस्याओं में भी मरीजों को किया जाता है रेफर
सिविल सर्जन ने कहा था कि छोटी-छोटी समस्याओं में भी मरीजों को रेफर करने के मामले में करगहर सीएचसी का आंकड़ा जिले में नंबर वन है. अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों को दवाइयां नहीं दिये जाने और बाहर से दवा खरीदने के लिए कहे जाने की शिकायत भी सामने आयी थी. उन्होंने बताया था कि अस्पताल में फिलहाल 170 प्रकार की दवाइयां उपलब्ध हैं.
जन्म प्रमाणपत्र बनाने में एक हजार रुपये लेने की शिकायत
डिजिटल जन्म प्रमाणपत्र बनाने के लिए भी प्रत्येक व्यक्ति से प्रति प्रमाणपत्र एक हजार रुपये लिये जाने की बात निरीक्षण के दौरान सामने आने की जानकारी सिविल सर्जन ने दी थी. उन्होंने इस मामले को भी गंभीरता से लिया था.
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चिकित्सकों का ड्यूटी रोस्टर खुद बनाने की कही थी बात
सिविल सर्जन ने कहा था कि अस्पताल में पदस्थापित सभी चिकित्सकों का ड्यूटी रोस्टर वह खुद तैयार करेंगे, जिसे आगे भी लागू रखा जायेगा. उन्होंने अस्पताल में व्याप्त कुव्यवस्था को दूर करने के लिए प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी सहित सभी कर्मियों को एक सप्ताह का समय दिया था.
उन्होंने चेतावनी दी थी कि इसके बावजूद अगर व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो अस्पताल में तैनात सभी चिकित्सकों और कर्मियों को बदल दिया जायेगा. साथ ही उन्होंने कहा था कि इस संबंध में जिलाधिकारी और स्थानीय विधायक से भी बात कर उनका सहयोग लेने का प्रयास किया जायेगा.
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डेढ़ माह बाद भी स्थिति में बदलाव नहीं
स्थानीय लोगों का कहना है कि सिविल सर्जन के निरीक्षण और दिये गये आश्वासन के करीब डेढ़ माह बाद भी अस्पताल की व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है. चिकित्सकीय और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर पहले जैसी स्थिति बनी हुई है. ऐसे में लोगों का कहना है कि निरीक्षण के दौरान दिये गये निर्देशों और आश्वासनों पर अब तक ठोस पहल नहीं होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
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