डेहरी ऑफिस. बाल विवाह बच्चों के अधिकारों का हनन करता है. उनके शिक्षा व स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है. बाल विवाह लड़के और लड़कियों दोनों को प्रभावित करता है. परंतु सबसे अधिक इससे प्रभावित लड़कियां होती हैं. उक्त बातें रविवार को डालमियानगर सब्जी मंडी के पास स्थित हनुमान मंदिर के प्रांगण में जय भारती सेवा संस्थान की ओर से आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए संस्थान के सचिव व नगर पूजा समिति के आचार्य विनय कुमार मिश्र उर्फ विनय बाबा ने कहीं. उन्होंने कहा बाल विवाह बच्चों की स्वतंत्रता और उनका बचपना छीन लेता है. बाल विवाह का दुष्परिणाम उनके शिक्षा और स्वास्थ्य पर स्पष्ट दिखायी देता है. अनुमानित तौर पर भारत में प्रत्येक वर्ष 18 साल से कम उम्र में करीब 15 लाख से अधिक लड़कियों की शादी होती है, जिसके कारण भारत में दुनिया की सबसे अधिक बाल वधुओं की संख्या है, जो विश्व की कुल संख्या का तीसरा भाग है. उन्होंने कहा यूनिसेफ इंडिया ने सरकार, सहभागी व संबंधित भागीदारों के साथ काम करते हुए राष्ट्रीय स्तर से लेकर जिला स्तर तक बाल विवाह रोकथाम व किशोर सशक्तीकरण की ‘स्केल-अप’ रणनीति में सफलता प्राप्त कर रहा है. लेकिन, इसकी रफ्तार धीमी है, पर आनेवाले दिनों में इसका व्यापक असर होगा. इस मौके पर लड़कियों ने कहा कि हम पढ़ेंगे और बढ़ेंगे. सुदूर ग्रमीण और शहरी क्षेत्र से आये महिला पुरुषों ने अपने बच्चों को पढ़ाने, नशा, बाल विवाह और अंधविश्वास जैसे कुरीतियों से दूर रहने बातें कहीं. उन्होंने अपने आसपास के सामाजिक बुराइयों को जड़ से मिटाने के साथ ही अपना घर, पड़ोस और पंचायत को नशामुक्त बनाने का संकल्प लिया.
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