भंडारे, भजन-कीर्तन व सत्संग में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ प्रतिनिधि, सासाराम ग्रामीण. शहर के कोठा टोली स्थित संतमत सत्संग समिति महर्षि मेंहीं ध्यानयोग सत्संग आश्रम में गुरुवार को संत सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज की 142वीं जयंती मनायी गयी. इस अवसर पर विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया गया. इसकी जानकारी सत्संग आश्रम के सदस्यों ने दी. उन्होंने बताया कि गुरुवार की सुबह करीब पांच बजे प्रभातफेरी निकाली गयी. प्रभातफेरी आश्रम से शुरू होकर विभिन्न मोहल्लों से गुजरते हुए पुनः आश्रम पहुंची. इसके बाद सुबह आठ बजे स्तुति-प्रार्थना, नौ बजे पुष्पांजलि, 11.30 बजे भंडारे, दोपहर तीन बजे भजन-कीर्तन व सत्संग का आयोजन हुआ. अंत में आरती के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया. इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि इतिहास इस बात का साक्षी है कि सदियों पूर्व संत कबीर साहब, गुरु नानक साहब, गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज, हाथरस के तुलसी साहब, संत पलटू साहब, दादू दयाल जी, मां मीरा, मां सहजोबाई व अनेक सूफी संतों ने इस धरा पर विभिन्न समय में अवतरित होकर मानव जाति को संसार सागर से पार होने का सही मार्ग दिखाया. वक्ताओं ने कहा कि भारतवर्ष प्राचीनकाल से ही ऋषि-महर्षियों की जन्मभूमि रहा है. इसी कड़ी में बिहार राज्य के पूर्णिया जिला अंतर्गत खोकसी श्याम नामक गांव में विक्रम संवत 1942 के वैशाख शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी, तदनुसार 28 अप्रैल 1885 को महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज का जन्म हुआ. उन्होंने अनेक कष्ट सहते हुए कठोर तपस्या कर संतमत के ज्ञान को प्राप्त किया और यह सिद्ध किया कि सबका ईश्वर एक है तथा उसके साक्षात्कार का मार्ग भी एक ही है, जो प्रत्येक व्यक्ति के भीतर विद्यमान है. मौके पर हरेराम तिवारी, महाराजो देवी, मुन्नी देवी, दीपक कुमार, संतोष कुमार गुप्ता, शोभा देवी, शिवमूरत गुप्ता, सुनीला देवी, ऋषि राय, चंदन कुमार, बैद्यनाथ सेठ आदि उपस्थित रहे.
महर्षि मेंहीं परमहंस की 142वीं जयंती पर निकली प्रभातफेरी
भंडारे, भजन-कीर्तन व सत्संग में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
