Bikramganj Ward Councillor Protest On Sanitation : बिक्रमगंज नगर परिषद की सफाई व्यवस्था को लेकर मंगलवार को बड़ा विवाद खड़ा हो गया. नगर के धनगाई इलाके के चार वार्डों में जनप्रतिनिधियों ने सफाई कर्मियों को वार्ड में घुसने से रोक दिया और नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए. इस कदम के बाद शहर की सफाई व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं और मामला तूल पकड़ता जा रहा है.
वार्ड संख्या 7 के पार्षद सैफ हुसैन, वार्ड 8 की पार्षद रिंदा देवी, वार्ड 9 की पार्षद और सशक्त स्थायी समिति की सदस्य रामझरो देवी तथा वार्ड 10 की पार्षद रानी देवी ने संयुक्त रूप से नगर परिषद के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. उनका कहना है कि कागजों पर सफाई मजदूरों की संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है, लेकिन जमीन पर इसका कोई असर नहीं दिख रहा.
Sasaram News : रिकॉर्ड में बढ़े मजदूर, वार्ड में नहीं दिख रही मौजूदगी
पार्षदों के अनुसार, मार्च 2026 तक नगर परिषद के रिकॉर्ड में 181 सफाई कर्मी कार्यरत थे. 5 जून 2026 को हुई सशक्त बोर्ड की बैठक के बाद यह संख्या बढ़ाकर 189 कर दी गई. यानी आठ नए सफाई मजदूर जोड़े गए, लेकिन ये मजदूर आखिर किस वार्ड में काम कर रहे हैं, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी जनप्रतिनिधियों को नहीं दी गई है.
जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि उनके वार्डों में पिछले कई महीनों से केवल तीन-तीन सफाई कर्मियों के भरोसे काम चल रहा है. बार-बार मांग करने के बावजूद न तो संख्या बढ़ाई गई और न ही व्यवस्था में कोई सुधार किया गया. इससे नाराज होकर उन्होंने सख्त कदम उठाते हुए सफाई कार्य का बहिष्कार कर दिया.
सफाई बहिष्कार से बढ़ी परेशानी
चार वार्डों में सफाई कार्य रुकने से स्थानीय लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. कचरा जमा होने की आशंका बढ़ गई है और स्थिति बिगड़ने का खतरा भी मंडरा रहा है. पार्षदों ने साफ कहा है कि जब तक उनके वार्डों में पर्याप्त संख्या में सफाई कर्मियों की तैनाती नहीं की जाएगी, तब तक वे सफाई कार्य शुरू नहीं होने देंगे.
सशक्त स्थायी समिति की सदस्य भी आंदोलन में शामिल
इस पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है इस बात ने कि सशक्त स्थायी समिति की सदस्य रामझरो देवी भी इस बहिष्कार आंदोलन में शामिल हैं. आमतौर पर समिति के सदस्य प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय की भूमिका निभाते हैं, लेकिन यहां खुद सदस्य का विरोध में उतरना कई सवाल खड़े कर रहा है.
नगर परिषद के 27 वार्डों में हर महीने सफाई व्यवस्था पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं. ऐसे में रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत के बीच अंतर ने पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है.
प्रशासन ने बातचीत से समाधान का दिया भरोसा
वहीं, इस पूरे मामले पर नगर स्वच्छता पदाधिकारी राहुल कुमार ने कहा कि धनगाई क्षेत्र के चार वार्डों में सफाई कर्मियों को लौटाए जाने की जानकारी मिली है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि संबंधित पार्षदों से बातचीत कर जल्द ही समस्या का समाधान निकाला जाएगा और सफाई व्यवस्था को सामान्य किया जाएगा.
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि रिकॉर्ड में बढ़ाए गए आठ अतिरिक्त सफाई मजदूर आखिर कहां तैनात हैं. इस मुद्दे पर अब शहर के लोगों की नजरें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं.
