Bihar Land Survey: खतरे में रैयतों की पुश्तैनी जमीन, रजिस्टर टू के फटने से हो रही परेशानी, अधिकारी भी परेशान

Bihar Land Survey: हजारों एकड़ ऐसी जमीन है, जिनके कागजात न तो रैयत के पास है और न ही सरकार के पास. खतियान या अन्य कागजात लेने पहुंचे लोगों को बताया जा रहा है कि रजिस्टर 2 क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जो बचा है वह आधा-अधूरा और कटे-फटे स्थिति में हैं.

Bihar Land Survey: रोहतास के चेनारी प्रखंड में विशेष भूमि सर्वे को लेकर एक अगस्त से प्रचार प्रसार शुरू होने के वाद रैयतों के बीच अपने कागजात सुधार कराने को लेकर अंचल कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ रहा है. खतियान में नाम गलती रकबा और अन्य कुछ सुधार को लेकर भूमि राजस्व विभाग के वेबसाइट परिमार्जन प्लस पर भू-स्वामी आवेदन कर रहे हैं. लेकिन अधिकांश आवेदन रजिस्टर टू फट जाने के कारण रैयतों को वापस कर दिया जा रहा है. इससे आये दिन भू-स्वामियों को अंचल कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ रहा है. राजस्व कर्मचारी की मानें, तो खतियान ब्रिटिश सरकार के शासनकाल में 1907 से लेकर 1910 के बीच कैडस्ट्रल सर्वे खतियान बनाया गया था, जो कि अत्यधिक पुराने होने के कारण बहुत से रजिस्टर टू फट गया है. ऐसे में परिमार्जन प्लस पर आये आवेदनों का निष्पादन करना मुश्किल हो जाता है.

खतरे में रैयतों की पुश्तैनी जमीन

भूमि सर्वेक्षण-24 को लागू तो कर दिया, लेकिन अब सरकार के लिए ही यह गले की फांस बनता जा रहा है. आपाधापी में शुरू हुए इस अभियान ने प्रखंड क्षेत्र के गांव में भूचाल मचा रखा है. रैयत और सरकार दोनों के पास पूरे कागजात नहीं हैं. रैयत अधिकारी से और अधिकारी रैयत से जमीन के कागजात मांग रहे हैं. हालात ऐसे हैं कि न खतियान का नकल मिल रहा है, न ही रजिस्टर-2 सही सलामत है. रजिस्टर-2 के कई पन्ने गायब मिल रहे हैं. सबसे मुश्किल बेलगामी जमीन रखने वाले रैयतों को हो रही है. उनके पास न खतियान है, न रजिस्टर-2 का पन्ना और क्योंकि उस जमीन की बंदोबस्ती रसीद नहीं होती है. ऐसे में उनके पास वह भी नहीं है.

जमाबंदी व दाखिल खारिज के मामले लंबित

प्रखंड में हजारों एकड़ ऐसी जमीन है, जिनके कागजात न तो रैयत के पास है और न ही सरकार के पास. खतियान या अन्य कागजात लेने पहुंचे लोगों को बताया जा रहा है कि रजिस्टर 2 क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जो बचा है वह आधा-अधूरा और कटे-फटे स्थिति में हैं. प्रखंड के अंदर बड़ी संख्या में लोगों के नाम जमाबंदी और रकबा का परिमार्जन, दाखिल-खारिज लंबित हैं. पुराने कागजात कैथी भाषा में रहने के कारण कोई समझने और समझाने वाला नहीं मिल रहा है. जमाबंदी के कागजात में प्लॉट नंबर है, तो चौहद्दी और रकबा नहीं चढ़ा है. सर्वे शुरू हुआ, तो अंचल कार्यालय में मनमानी बढ़ गयी है.

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रजिस्टर टू में खाता खोजने के नाम पर हो रही अवैध वसूली

अगर किसी रैयत का ऑनलाइन नाम गलत हो गया या रकबा कम दिखा रहा है व खाता ऑनलाइन नहीं चढ़ा है, तो रैयत भूमि सुधार विभाग की वेबसाइट पर परिमार्जन प्लस पर आवेदन करते हैं. उस आवेदन को राजस्व कर्मचारियों के द्वारा रजिस्टर टू से मिलाया जाता है. इसके बाद वह आवेदन राजस्व अधिकारी व अंचल अधिकारी के लॉगिन आइडी पर भेजा जाता है. लेकिन राजस्व कर्मचारियों के द्वारा मुंशी के द्वारा रजिस्टर टू खोजने के नाम पर रैयतों से मनमाने ढंग से पैसा लिया जाता है, जबकि रजिस्टर टू खोज कर मिलान करना राजस्व कर्मचारी का काम है.

क्या है रजिस्टर टू

1907 के ब्रिटिश सरकार के सर्वे के दौरान रजिस्टर टू बनाया गया था. वही रजिस्टर टू अब तक चला आ रहा है. रजिस्टर टू को जमाबंदी पंजी 2 भी कहा जाता है. इस प्रणाली के जरिये बिहार सरकार भूमि से जुड़ी जानकारी इकट्ठा करती है और उसका प्रबंधन करती है. रजिस्टर शब्द के कई मतलब होते हैं, लेकिन सबसे आम मतलब है आधिकारिक रूप से लिखना या रिकॉर्ड करना. आम तौर पर रजिस्टर में किसी घटना, लेन-देन, नाम, या अन्य जानकारी को रिकॉर्ड किया जाता है. रजिस्टर में पिछली घटनाएं, लेन-देन, नाम, या अन्य जानकारी शामिल होती है.

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क्या बोलीं अंचलाधिकारी

चेनारी अंचलाधिकारी पूजा शर्मा ने बताया कि जिन भू-स्वामियों का रजिस्टर टू का पन्ना फट गया है, उन्हें जमाबंदी पुनर्गठन प्रक्रिया के तहत परिमार्जन प्लस पर आवेदन करने के बाद अभिलेख खोलकर अमीन के द्वारा भौतिक सत्यापन करने के बाद उनकी जमाबंदी खोल दी जायेगी.

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Author: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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