खैराबेद विद्यालय के निरीक्षण में खुली पोल, फर्जी उपस्थिति और वित्तीय गड़बड़ी उजागर

एमडीएम और रोकड़ पंजी में भारी अनियमितता पर बीइओ ने मांगा स्पष्टीकरण

कागजों पर हाजिरी : रजिस्टर में 125 छात्र दर्ज, मौके पर मिले मात्र 56 विद्यार्थी एमडीएम और रोकड़ पंजी में भारी अनियमितता पर बीइओ ने मांगा स्पष्टीकरण फोटो-2- खैराबेद विद्यालय में उपस्थित पंजी का जांच करते प्रभारी बीइओ. प्रतिनिधि, चेनारी प्रखंड क्षेत्र के मध्य विद्यालय खैराबेद में प्रभारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी के औचक निरीक्षण के दौरान बड़ी अनियमितताएं उजागर हुई हैं. बीइओ राजेश सिंह ने बताया कि जांच में विद्यालय की व्यवस्था और वित्तीय अनुशासन पूरी तरह ध्वस्त पाया गया. विद्यालय में कुल 156 विद्यार्थियों का नामांकन है, लेकिन उपस्थिति पंजी की जांच में 125 छात्र-छात्राओं की हाजिरी दर्ज मिली. इसके उलट, जब मौके पर भौतिक सत्यापन किया गया, तो केवल 56 विद्यार्थी ही उपस्थित पाये गये. यह डाटा स्पष्ट रूप से उपस्थिति में हेरफेर की ओर इशारा करता है. निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि विद्यालय की रोकड़ पंजी वर्ष 2022 से अब तक संधारित नहीं की गयी है. इसके अतिरिक्त, मध्याह्न भोजन योजना (एमडीएम) में भारी घोटाले की आशंका जतायी गयी है, क्योंकि 17 अप्रैल से निरीक्षण की तिथि तक इसका कोई रिकॉर्ड संधारित नहीं पाया गया. विद्यालय में नामांकन पंजी भी अपडेट नहीं थी और सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि किसी भी शिक्षक या शिक्षिका के पास पाठ टीका (लेसन प्लान) उपलब्ध नहीं था. इस घोर लापरवाही को देखते हुए बीइओ ने प्रभारी प्रधानाध्यापक और संबंधित शिक्षिका से स्पष्टीकरण मांगा है. उन्होंने चेतावनी दी कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ एमडीएम की राशि की वसूली की जायेगी. बीइओ द्वारा लगातार किये जा रहे निरीक्षणों से प्रखंड के शिक्षकों में हड़कंप की स्थिति है. इसी कड़ी में कैमूर पहाड़ी के ऊपर स्थित औरैया, भुरकुंडा और उरदगा के विद्यालयों में शिक्षकों के नहीं पहुंचने की गंभीर शिकायतें मिल रही हैं. स्थानीय निवासी दीनबंधु यादव ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों के स्कूलों में शिक्षक कभी-कभार ही अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है और उनका भविष्य अंधकारमय है. ग्रामीणों ने मांग की है कि बीइओ मैदानी इलाकों के साथ-साथ महीने में कम से कम दो बार पहाड़ी क्षेत्रों के विद्यालयों की भी प्रभावी जांच करें ताकि वहां की शिक्षा व्यवस्था में सुधार हो सके.

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Published by: Anurag sharan

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