करोड़ों की ठगी का मुख्य आरोपित पत्नी समेत गिरफ्तार
माइक्रो फाइनेंस व बैंकों की मिलीभगत से 300 ग्रामीणों को बनाया शिकार
By ANURAG SHARAN | Updated at :
तीन वर्षो से फरार ठग पिता के श्राद्ध में पहुंचा अपने गांव, सूचना पर पहुंची पुलिस
माइक्रो फाइनेंस व बैंकों की मिलीभगत से 300 ग्रामीणों को बनाया शिकार
सीएसपी के माध्यम से गरीबों के नाम पर निकाले करोड़ों रुपये, प्रत्येक व्यक्ति पर पांच से आठ लाख का कर्ज ग्रामीणों का आक्रोश: बैंक कर्मियों की संदिग्ध भूमिका, बिना ठोस कागजात पास किये गये लोन
एसडीपीओ ने थाने पहुंचकर पीड़ितों को दिया निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा
फोटो -16- थाना परिसर में लगी लोनधारियों की भीड़. ए- आरोपित को जेल भेजती पुलिस
प्रतिनिधि, काराकाट रोहतास जिले के काराकाट थाना क्षेत्र अंतर्गत मोथा गांव में माइक्रो फाइनेंस कंपनियों और बैंकों की मिलीभगत से करीब तीन सौ महिला-पुरुषों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाला मुख्य आरोपित राजू गुप्ता आखिरकार पुलिस की गिरफ्त में आ गया. पुलिस ने राजू गुप्ता के साथ उसकी पत्नी नीलम देवी को भी गिरफ्तार किया है. यह गिरफ्तारी उस समय हुई जब फरार चल रहा आरोपित अपने पिता स्व शिव कुमार साह की मृत्यु के बाद श्राद्ध कर्म के लिए गांव पहुंचा था. जैसे ही ग्रामीणों को उसके आने की भनक लगी, उन्होंने उसे घेर लिया और पुलिस के हवाले कर दिया.
सीएसपी के जरिये बुना ठगी का
जाल
जानकारी के अनुसार, आरोपित राजू गुप्ता का बेटा प्रिंस गुप्ता गांव में ही एक ग्राहक सेवा केंद्र (सीएसपी) चलाता था. इसी केंद्र की आड़ में ठगी का बड़ा साम्राज्य खड़ा किया गया. आरोपितों ने करीब सात से आठ माइक्रो फाइनेंस कंपनियों, बंधन बैंक और दक्षिण बिहार ग्रामीण बैंक के कर्मियों से साठगांठ कर ग्रामीणों के अलग-अलग समूह बनाये. इन समूहों के माध्यम से गरीब महिलाओं और पुरुषों के नाम पर लोन पास कराये गये. जब लोन की राशि लाभार्थियों के खाते में आती थी, तो आरोपित उन्हें झांसा देते थे कि वे केवल 8 से 10 हजार रुपये अपने पास रखें और शेष राशि उनके खाते में ट्रांसफर कर दें. ग्रामीणों को विश्वास दिलाया गया कि लोन की किस्तों का भुगतान आरोपित स्वयं करेंगे और लाभार्थियों को बैंक जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
आठ साल तक चलता रहा खेल, ऐसे हुआ खुलासा
ठगी का यह सिलसिला पिछले सात से आठ वर्षों से लगातार चल रहा था. आरोपित बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर नये-नये लोन स्वीकृत करवाता रहा और पुरानी किस्तों को समय पर जमा कर बैंक का विश्वास जीतता रहा. जब एक-एक व्यक्ति के नाम पर 5 से 8 लाख रुपये तक का कर्ज हो गया, तो आरोपित राजू गुप्ता और उसका बेटा सीएसपी बंद कर अपनी संपत्ति बेचकर गांव से फरार हो गये. मामला तब उजागर हुआ जब बैंकों में किस्तों का भुगतान बंद हो गया और बैंक कर्मी वसूली के लिए ग्रामीणों के दरवाजे पर पहुंचे. बैंक रिकॉर्ड देखकर ग्रामीणों के होश उड़ गये, क्योंकि उनके नाम पर लाखों का कर्ज दर्ज था.
दो अलग-अलग प्राथमिकियों में पुलिस की कार्रवाई
इस महाघोटाले में अब तक दो मुख्य प्राथमिकियां दर्ज की गयी हैं. पहली प्राथमिकी वर्ष 2024 में (कांड संख्या- 456/24) माधुरी देवी के बयान पर दर्ज थी, जिसमें 7 लाख की ठगी का आरोप था. इसमें राजू गुप्ता, रामावती देवी, अरविंद कुमार, संगीता राज, नीलम देवी, ममता देवी और उत्कर्ष व बंधन बैंक के शाखा प्रबंधकों को आरोपित किया गया था. दूसरी प्राथमिकी रिंकू देवी के बयान पर (कांड संख्या- 126/26) दर्ज की गयी, जिसमें 12 लाख 80 हजार रुपये की ठगी का उल्लेख है. इसी कांड में पुलिस ने राजू गुप्ता और नीलम देवी को जेल भेजा है. इस मामले में 26 अन्य पीड़ितों ने भी अपने बैंक विवरण पुलिस को सौंपे हैं.
बिना कागजात के दिये गये करोड़ों के लोन
हैरानी की बात यह है कि करीब 200 से अधिक लाभार्थियों के पास लोन से संबंधित कोई वैध कागजात ही नहीं हैं. पीड़िता सोनी देवी ने बताया कि आरोपित केवल एक रजिस्टर पर हस्ताक्षर लेकर कुछ नकद राशि थमा देते थे. बैंक अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका इसलिए भी गहरी है, क्योंकि एक ही व्यक्ति के नाम पर सात-आठ अलग-अलग बैंकों से लाखों का लोन बिना किसी पुख्ता जांच के कैसे पास हो गया. वर्तमान में केवल 35 लोगों के पास ही बैंक से जुड़े कुछ दस्तावेज उपलब्ध हैं, जबकि अन्य के नाम पर करोड़ों की हेराफेरी की आशंका है.
अधिकारियों ने लिया संज्ञान
मुख्य आरोपित की गिरफ्तारी की खबर मिलते ही करीब 300 पीड़ित ग्रामीण काराकाट थाना पहुंच गये, जिससे वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया. स्थिति को संभालने के लिए एसडीपीओ बिक्रमगंज सुधांशु शेखर सिंह स्वयं थाने पहुंचे और आक्रोशित ग्रामीणों को शांत कराया. उन्होंने पुलिस प्रशासन को सख्त हिदायत दी कि संदिग्ध माइक्रो फाइनेंस कंपनियों और बैंकों की भूमिका की गहराई से जांच की जाए. थानाध्यक्ष विवेक कुमार ने बताया कि दो आरोपितों को जेल भेज दिया गया है और इस कांड में संलिप्त अन्य 13 नामजद आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है.