छपरा. कल तक गांव की जो महिलाएं घर की दहलीज पार करने में संकोच करती थीं, आज वह जीविका के माध्यम से एक सफल उद्यमी बनने की ओर अग्रसर हैं. कई महिला जिनकी पढ़ाई महज प्रारंभिक कक्षाओं तक ही हुई है. वह आज प्रतिमाह 35 से 50 हजार तक का आय अर्जित कर रही हैं. बुधवार को मुख्यमंत्री के समृद्धि यात्रा के दौरान भी जीविका दीदियों द्वारा लगाये गये स्टॉल पर बिहार के विकास की एक अलग ही झलक देखने को मिली. जलालपुर की आनंदी देवी जिनकी पहचान कुछ साल पहले तक महज एक ग्रामीण महिला की थी, खाना बनाना और घरेलू कामकाज तक ही उनकी दिनचर्या सीमित थी. लेकिन आज जीविका से जुड़कर वह अपना उद्योग तैयार कर चुकी हैं. आनंदी देवी ने बताया कि वह विगत दो सालों से भूंजा एवं अचार बना रही हैं, उनके साथ गांव की अन्य कई महिलाएं भी जुड़कर उनके छोटे से उद्योग को सफल बनाने में सहयोग कर रही हैं उनके यहां बनाया हुआ भूंजा उत्तर प्रदेश के कई जिलों तक सप्लाइ हो रहा है. सोनपुर, नगरा, मढौरा, दरियापुर, रिविलगंज आदि क्षेत्रों से आयी महिलाएं भी स्वरोजगार की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा रही हैं. सीता देवी सिक्की एवं कुश निर्मित उत्पाद बनाती हैं. वहीं जयमाला देवी व ललिता देवी लघु वस्त्र उद्योग के द्वारा ऊनी वस्त्र का निर्माण करती हैं. जिसकी सप्लाइ छपरा के बाजारों के अलावा पड़ोसी जिलों में भी हो रही है. मशरूम उत्पादन में लालती देवी एक नयी पहचान बना रही हैं. लालती देवी के साथ गांव की 10 से अधिक महिलाएं मशरूम उत्पादन में उनके साथ जुड़कर काम कर रही हैं. इतना ही नहीं कृषि के क्षेत्र में भी जीविका से जुड़कर महिलाएं काफी उन्नति कर रही हैं. मुख्यमंत्री ने जब जीविका दीदियों के स्टॉल का अवलोकन किया. उस दौरान जीविका से जुड़ी मधु देवी ने बताया कि वह जैविक खाद बनाती हैं. गांव के किसानों समेत आसपास के किसान भी उनसे जैविक खाद ले जाते हैं. यह सभी महिला उद्यमी सरकार की योजनाओं से लाभान्वित हो रही हैं. मुख्यमंत्री ने भी अवलोकन के दौरान कहा कि सरकारी योजनाओं तथा बिहार राज्य जीवीकोपार्जन समिति के निरंतर सहयोग से ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर हो रही हैं. यह महिलाएं न केवल अपने परिवारों की स्थिति आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बना रही हैं, बल्कि अपने गांव और समाज में रोजगार के नये अवसरों का सृजन कर सामाजिक व आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि जीविका से जुड़ी महिलाएं नारी सशक्तीकरण की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत कर रही हैं.
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