Saran News : वित्त रहित शिक्षक-शिक्षकेत्तर कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा, बिहार पटना के लंबे संघर्ष के परिणामस्वरूप शिक्षक दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा वेतनमान की घोषणा किए जाने का शिक्षक नेताओं ने स्वागत किया है. गड़खा के बसंत महाविद्यालय बसंत के पूर्व प्राचार्य सह बिहार शिक्षक शिक्षकेत्तर कर्मचारी संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. विजय सिंह ने इसके लिए सरकार के साथ-साथ आंदोलन से जुड़े शिक्षक संगठनों और जनप्रतिनिधियों के प्रति आभार जताया है.
वर्षों के संघर्ष के बाद वेतनमान की घोषणा
डॉ. विजय सिंह ने कहा कि वित्त रहित शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के वेतनमान को लेकर लंबे समय से संघर्ष किया जा रहा था. शिक्षक दिवस समारोह के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा वेतनमान की घोषणा किए जाने से इस संघर्ष को महत्वपूर्ण उपलब्धि मिली है. उन्होंने कहा कि अब घोषणा को जल्द से जल्द धरातल पर लागू किया जाना चाहिए.
शिक्षक संगठनों और जनप्रतिनिधियों का जताया आभार
उन्होंने सभी संबद्ध डिग्री महाविद्यालयों, इंटर एवं माध्यमिक विद्यालयों के विभिन्न संघों और संगठनों के नेताओं के साथ स्नातक एवं शिक्षक जनप्रतिनिधियों के प्रति भी आभार व्यक्त किया. उन्होंने बिहार विधान परिषद के सदस्यों के अलावा नौ सदस्यीय स्नातक-शिक्षक प्रतिनिधिमंडल की भूमिका की भी सराहना की.
इन एमएलसी के योगदान को बताया अहम
डॉ. विजय सिंह ने विशेष रूप से एमएलसी संजीव कुमार सिंह कोशी, नवल किशोर यादव पटना, संजय सिंह तिरहुत, वीरेंद्र नारायण यादव और अफाक अहमद सारण के प्रति धन्यवाद व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि इन जनप्रतिनिधियों ने सड़क से लेकर सदन तक वित्त रहित शिक्षकों की आवाज को मजबूती से उठाया.
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई पहली बैठक
वेतनमान की घोषणा के बाद इसके क्रियान्वयन की दिशा में प्रक्रिया भी आगे बढ़ी है. सात सितंबर को मुख्य सचिव बिहार सरकार की अध्यक्षता में इस संबंध में पहली बैठक आयोजित की गयी. बैठक के बाद शिक्षक नेताओं में उम्मीद जगी है कि मुख्यमंत्री की घोषणा को जल्द ही लागू करने की दिशा में ठोस निर्णय लिया जाएगा.
अवकाश प्राप्त कर्मियों के लिए पेंशन की भी मांग
मोर्चा के नेताओं ने बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह से मुलाकात कर मुख्यमंत्री की घोषणाओं को अतिशीघ्र लागू करने की मांग की. साथ ही अवकाश प्राप्त शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के लिए भी पेंशन की व्यवस्था करने की मांग रखी गयी. शिक्षक नेताओं का कहना है कि लंबे समय तक सेवा देने वाले सेवानिवृत्त कर्मियों को भी सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिलनी चाहिए.
