नगरा में वर्षों से किराये के मकान में चल रहा सीडीपीओ कार्यालय, विभाग मौन

महिला व बाल विकास विभाग के अधीन आने वाला नगरा बाल विकास परियोजना कार्यालय यानी सीडीपीओ कार्यालय वर्षों से किराये के मकान में संचालित हो रहा है.

नगरा. महिला व बाल विकास विभाग के अधीन आने वाला नगरा बाल विकास परियोजना कार्यालय यानी सीडीपीओ कार्यालय वर्षों से किराये के मकान में संचालित हो रहा है. यह स्थिति अब महज अस्थायी व्यवस्था नहीं, बल्कि विभागीय उदासीनता का स्थायी प्रतीक बन चुकी है. सरकारी योजनाओं के नाम पर हर साल प्रस्ताव भेजे जाते हैं, लेकिन जमीन पर बदलाव शून्य है. जिस कार्यालय से महिलाओं और बच्चों के भविष्य की दिशा तय होती है, वही दफ्तर आज भी अपने भवन से वंचित है.

वहीं प्रखंड क्षेत्र के 10 पंचायतों के विभिन्न वार्डों में कुल 139 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जिनमें से 74 केंद्र खुद किराये के मकानों में चल रहे हैं. यानी व्यवस्था की जड़ में ही अस्थायित्व समाया हुआ है. ऐसे में निगरानी, समन्वय और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की उम्मीद कैसे की जाये यह बड़ा सवाल है. सीडीपीओ कार्यालय की कार्यप्रणाली सीमित जगह और अव्यवस्थित संसाधनों के बीच सिमटकर रह गयी है. फाइलों का ढेर, दस्तावेजों की कमी-बेसी और बैठकों के लिए अपर्याप्त स्थान यही रोजमर्रा की हकीकत है.कर्मचारी मानते हैं कि स्थायी भवन के अभाव में न तो कार्य की गति बन पाती है और न ही योजनाओं की पारदर्शी मॉनीटरिंग हो पाती है. स्थानीय लोगों और आंगनबाड़ी सेविकाओं का कहना है कि हर साल भवन निर्माण की बात उठती है, प्रस्ताव भेजे जाते हैं, लेकिन मंजूरी की फाइलें आगे नहीं बढ़तीं. परिणामस्वरूप, सेविकाओं की मासिक बैठकें, प्रशिक्षण और लाभार्थियों से जुड़े कार्य प्रभावित होते हैं. महिलाओं को आवश्यक जानकारी और प्रक्रियाएं पूरी कराने में अतिरिक्त समय लगता है, जिससे व्यवस्था पर भरोसा कमजोर पड़ता है.

वास्तविकता यह है कि कागजों पर चमकती योजनाएं जमीनी अव्यवस्था में दम तोड़ती दिख रही हैं. अधिकारी बदलते रहे, फाइलें चलती रहीं, लेकिन सीडीपीओ कार्यालय की हालत जस की तस बनी रही. जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि आखिर वर्षों से यही स्थिति क्यों है, जब अन्य विभाग प्रखंड मुख्यालय स्थित है तो यह सबसे अलग हटकर नगरा बाजार में सब्जी मार्केट के ऊपर क्यों है, यही महिला एवं बाल विकास विभाग को ही क्यों बार-बार नजर अंदाज किया जा रहा है. उनका कहना है कि यह लापरवाही प्रशासनिक कमजोरी के साथ-साथ उन हजारों महिलाओं और बच्चों के अधिकारों पर भी चोट है, जिनके लिए ये योजनाएं बनी हैं.

क्या कहते है अधिकारी

सीडीपीओ कार्यालय के सीमित संसाधनों में भी सभी योजनाओं का संचालन किया जा रहा है. आंगनबाड़ी केंद्रों की निगरानी, पोषण योजनाओं और अन्य विभागीय कार्य नियमित रूप से किये जा रहे हैं. सरकारी भवन के व्यवस्था के लिए संबंधित विभाग को चिट्ठी भेजी गयी है. भवन स्वीकृत होने के बाद व्यवस्था में निश्चित रूप से और बेहतर सुधार होगा.पूजा रानी, प्रभारी सीडीपीओ, नगरा

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Published by: Alok kumar

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