छपरा. छपरा नगर निगम बनने के बाद भी इसकी सुविधाएं नगर पंचायत जैसी ही बनी हुई हैं. नगर निगम क्षेत्र में आवारा पशुओं की समस्या चरम पर पहुंच चुकी है, लेकिन प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है. शहर के किसी भी इलाके को देखा जाए तो आवारा कुत्तों, बंदरों की टोलियां और बड़े जानवरों के झुंड नजर आ ही जाते हैं. राह चलते लोगों को इन जानवरों से गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. खासकर छोटे बच्चों के लिए यह स्थिति और भी भयावह हो गयी है. कई बार आवारा कुत्तों के झुंड बच्चों को देखकर उन पर हमला कर देते हैं. अब तक शहर में दर्जन भर से अधिक लोग कुत्तों के काटने के शिकार हो चुके हैं.
बंदरों का आतंक से घरों में भी सुरक्षित नहीं लोग
बंदरों की बढ़ती संख्या ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है. शहर के कई इलाकों में लोग अपने घरों की खिड़कियों और बालकनियों में जालियां लगवाने को मजबूर हो गये हैं. आम नागरिक ही नहीं, कलेक्ट्रेट परिसर में तैनात दर्जन भर से अधिक अधिकारी भी बंदरों की शरारतों से परेशान हैं. कलेक्ट्रेट के आधा दर्जन डिप्टी कलेक्टर अपने सरकारी आवास में रहते हैं, लेकिन बंदरों के आतंक के कारण वे भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे. इसको लेकर कई बार शिकायत जिले के मुखिया से की है लेकिन निजात नहीं मिल पाया है.आवारा कुत्तों का आतंक, सड़कों पर जमाया कब्जा
छपरा नगर निगम क्षेत्र के कई प्रमुख इलाकों में इन दिनों आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ता जा रहा है. दर्जनों की संख्या में ये कुत्ते सड़कों पर झुंड बनाकर घूमते रहते हैं और कब किस पर हमला कर दें, इसका कोई भरोसा नहीं. सुबह के समय जब छोटे स्कूली बच्चे बैग और टिफिन लेकर स्कूल जाते हैं, तो ये कुत्ते उनके लिए सबसे बड़ी परेशानी का कारण बन जाते हैं. कई बार ऐसा होता है कि बच्चों को देखकर ये कुत्ते अचानक झपट पड़ते हैं, मानो उन्हें कोई मनचाही चीज मिल गयी हो. अगर आस-पास बड़े मौजूद होते हैं, तो हो-हल्ला मचाकर बच्चों को बचा लिया जाता है.सांडों की पटखनी से जान संसत में
छपरा शहर में आवारा सांडों का आतंक दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है. शहर के लगभग हर प्रमुख भीड़-भाड़ वाले इलाके इनसे प्रभावित हैं. मुख्य चौक, साहिबगंज, गुदरी बाजार, भगवान बाजार, सरकारी बाजार और करीम चौक जैसे व्यस्त क्षेत्रों में राहगीरों को आवारा सांडों के कारण भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. जब ये सांड सड़क पर आ जाते हैं, तो लोगों के आने-जाने में परेशानी होने लगती है. कई बार ये बड़ी संख्या में इकट्ठा होकर आपस में लड़ने लगते हैं, जिससे सड़क जाम हो जाती है और लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है. स्थिति इतनी गंभीर हो गयी है कि कई बार ये सांड गाड़ियों और पैदल चलने वालों पर हमला भी कर देते हैं, जिससे दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं. वर्तमान में शहर में आवारा पशुओं की संख्या दो सौ के करीब पहुंच गयी है, लेकिन नगर निगम प्रशासन इस समस्या को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा.ठोस निर्णय लिये जायेंगे
यह सच है कि शहर के लोग आवारा पशुओं की समस्या से काफी परेशान हैं, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस योजना नहीं बनायी गयी है. हालांकि, जल्द ही बोर्ड की बैठक में इस महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाया जायेगा और इसे लेकर ठोस निर्णय लिये जायेंगे, जिससे आम जनता को राहत मिल सके.लक्ष्मी नारायण गुप्ता, महापौर, छपरा नगर निगम
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