RTE Act TET Exemption Bihar Teachers: बिहार राजकीयकृत प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता से मुक्त करने की मांग को लेकर महाराजगंज सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल को ज्ञापन सौंपा. प्रतिनिधिमंडल ने सांसद से संसद के आगामी मानसून सत्र में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने का आग्रह किया.
आरटीई एक्ट में संशोधन की उठाई मांग
संघ के प्रदेश अध्यक्ष उदयशंकर गुड्डू के नेतृत्व में शिक्षक प्रतिनिधिमंडल ने जलालपुर स्थित सांसद के संसदीय कार्यालय में मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता लागू करना न्यायसंगत नहीं है. इसलिए आरटीई एक्ट में संशोधन कर ऐसे शिक्षकों को राहत दी जानी चाहिए.
सांसद ने दिया भरोसा
सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने शिक्षक प्रतिनिधियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि शिक्षक समाज के राष्ट्र निर्माता हैं और उनकी मांगें उचित हैं. उन्होंने कहा कि संसद के आगामी मानसून सत्र में वह इस मुद्दे को पूरी मजबूती से उठाएंगे और सरकार से आरटीई अधिनियम में संशोधन कर टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग करेंगे.
शिक्षक संघ ने बताई कानूनी पृष्ठभूमि
शिक्षक संघ ने बताया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के बाद राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना में इस तिथि से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट दी गई थी. हालांकि, आरटीई अधिनियम में वर्ष 2017 में हुए संशोधन और उसके बाद आए न्यायिक निर्णयों के कारण कई शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य हो गया. संघ का कहना है कि इससे लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के हित प्रभावित हुए हैं और इसी कारण देशभर के शिक्षक संगठन आरटीई एक्ट में संशोधन की मांग कर रहे हैं.
ये रहे मौजूद
ज्ञापन सौंपने वालों में बिहार राजकीयकृत प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष उदयशंकर गुड्डू, सारण प्रमंडल अध्यक्ष उमेश प्रसाद यादव, सारण जिलाध्यक्ष डॉ. राजेश यादव, प्रधान सचिव संजय सिंह, प्रदेश मीडिया प्रभारी सह जिला सचिव अमित प्रकाश समेत बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल रहे.
