सोनपुर में बाढ़ का बढ़ता संकट, DRM कार्यालय के पास मवेशियों संग डेरा डाल रहे परिवार

सोनपुर में गंगा-गंडक का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ पीड़ित रेलवे स्टेशन और डीआरएम कार्यालय के पास शरण ले रहे हैं। प्रशासन द्वारा सामुदायिक किचेन से राहत दी जा रही है।

Saran News : गंगा और गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर से सोनपुर के दियारा और निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है. बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से बड़ी संख्या में परिवार सुरक्षित स्थानों की तलाश में सोनपुर रेलवे स्टेशन और मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) कार्यालय के आसपास पहुंचकर शरण ले रहे हैं.

दो फीट और बढ़ा पानी तो स्टेशन क्षेत्र पर भी मंडराएगा खतरा

फिलहाल रेलवे स्टेशन गेट और डीआरएम कार्यालय के आसपास का इलाका बाढ़ के पानी से सुरक्षित है. हालांकि, गंगा और गंडक के जलस्तर में करीब दो फीट की और वृद्धि होने पर इस क्षेत्र में भी बाढ़ का पानी पहुंचने का खतरा है. इसे देखते हुए यहां शरण लेने वाले परिवारों की चिंता बढ़ गई है.

सामान और मवेशियों के साथ खुले में रहने की मजबूरी

डीआरएम कार्यालय के समीप सैकड़ों बाढ़ पीड़ित परिवार अपने सामान और मवेशियों के साथ डेरा डाले हुए हैं. इनके सामने रहने के साथ-साथ मवेशियों के लिए चारा और भोजन की समस्या भी बनी हुई है. ग्रामीण अपने घरों से जरूरी सामान लेकर किसी तरह सुरक्षित स्थान तक पहुंचे हैं. कई परिवार खुले में तिरपाल लगाकर रहने को मजबूर हैं.

रेलवे सामुदायिक भवन में ठहराए गए बाढ़ पीड़ित

इसी क्षेत्र में स्थित रेलवे सामुदायिक भवन में भी बाढ़ग्रस्त इलाकों से आए लोगों को ठहराया गया है. प्रशासन की ओर से यहां सामुदायिक किचेन की व्यवस्था की गई है, जहां बाढ़ पीड़ितों के लिए भोजन तैयार कर उपलब्ध कराया जा रहा है. इससे विस्थापित परिवारों को तत्काल राहत मिल रही है.

सामुदायिक किचेन में व्यवस्था का लिया जायजा

सामुदायिक किचेन में भोजन की व्यवस्था, साफ-सफाई और बाढ़ पीड़ितों को मिल रही सुविधाओं का जायजा प्रशासनिक अधिकारियों के साथ जिला परिषद सदस्य सुनील राय ने भी लिया. उन्होंने किचेन में तैयार हो रहे भोजन की गुणवत्ता और वितरण व्यवस्था की जानकारी ली. साथ ही प्रभावित परिवारों से बातचीत कर उनकी समस्याओं को भी जाना.

बाढ़ पीड़ितों ने मांगा चारा, पानी और अस्थायी आश्रय

बाढ़ पीड़ितों ने बताया कि पानी बढ़ने के कारण घरों में रहना मुश्किल हो गया है. खेत और ग्रामीण रास्ते जलमग्न हो चुके हैं. ऐसे में परिवार के सदस्यों के साथ मवेशियों को लेकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचना उनकी मजबूरी बन गई है. लोगों ने प्रशासन से मवेशियों के लिए पर्याप्त चारा, पीने का पानी, दवा और अस्थायी आश्रय की व्यवस्था बढ़ाने की मांग की है.

जलस्तर बढ़ा तो बढ़ सकती है मुश्किल

स्थानीय लोगों का कहना है कि सोनपुर रेलवे स्टेशन और डीआरएम कार्यालय के आसपास का इलाका फिलहाल अपेक्षाकृत सुरक्षित है, इसलिए बड़ी संख्या में बाढ़ प्रभावित परिवार यहां पहुंच रहे हैं. लेकिन जलस्तर में और वृद्धि होने पर यहां भी खतरा उत्पन्न हो सकता है. ऐसे में प्रशासन और रेलवे को संभावित स्थिति को देखते हुए पहले से वैकल्पिक सुरक्षित स्थानों की पहचान करने और राहत व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है.

सामुदायिक किचेन बना राहत का प्रमुख केंद्र

बाढ़ के बीच रेलवे सामुदायिक भवन में ठहरे लोगों और डीआरएम कार्यालय के समीप खुले में रह रहे परिवारों के लिए सामुदायिक किचेन फिलहाल राहत का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है. प्रभावित लोगों को उम्मीद है कि जलस्तर स्थिर होने तक प्रशासन की ओर से भोजन, पेयजल, मवेशियों के लिए चारा और अन्य जरूरी सुविधाएं लगातार उपलब्ध कराई जाएंगी.

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By चंद्रशेखर कुमार

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