Saran Flood: नेपाल और देश के अन्य पर्वतीय क्षेत्रों में हो रही बारिश का असर सारण जिले की नदियों पर दिखने लगा है. मंगलवार को गंगा, गंडक और घाघरा के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गयी. गंगा के गांधी घाट और घाघरा छपरा में जलस्तर में करीब आधा मीटर तक वृद्धि हुई. वहीं गंडक के हाजीपुर और रेवा में भी जलस्तर 30 से 37 सेंटीमीटर तक बढ़ा है. जलस्तर में अचानक हुई वृद्धि के बाद प्रशासन और इंजीनियरिंग विभाग की टीमें अलर्ट मोड में आ गयी हैं.
रातभर नदी तटों पर होती रही पेट्रोलिंग
नदियों के जलस्तर में वृद्धि को देखते हुए प्रशासनिक और इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारी रातभर नदी घाटों और तटबंधों की पेट्रोलिंग करते रहे. सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए गश्त बढ़ा दी गयी है. साथ ही बाढ़ से बचाव के लिए जरूरी सुरक्षात्मक उपाय भी किए जा रहे हैं. हालांकि, अधिकारियों के अनुसार फिलहाल जिले में स्थिति नियंत्रण में है और घबराने जैसी स्थिति नहीं है.
गंडक बैराज से छोड़ा गया 1.5 लाख क्यूसेक से अधिक पानी
नदियों के बढ़ते जलस्तर के पीछे नेपाल में हो रही बारिश के साथ वाल्मीकिनगर गंडक बैराज से छोड़ा जा रहा पानी भी प्रमुख कारण बताया जा रहा है. मंगलवार को भी गंडक बैराज से 1.50 लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया. इसके कारण गंडक समेत जिले की अन्य नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है.
डीएम ने तटों पर लगातार नजर रखने का दिया निर्देश
गंगा समेत अन्य नदियों के जलस्तर में वृद्धि को लेकर जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने सभी संबंधित पदाधिकारियों को पूरी तैयारी के साथ सतर्क रहने और नदी तटों पर लगातार नजर बनाए रखने का निर्देश दिया है. फ्लड फाइटिंग का काम लगातार जारी रखने के साथ गंडक के तटबंधों पर आवश्यक सामग्री का पर्याप्त स्टॉक रखने को कहा गया है.
मकेर, दरियापुर, पानापुर, तरैया एवं परसा-अमनौर क्षेत्रों में आश्रय स्थल, कम्युनिटी किचन और पशु आश्रय स्थल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है. पीएचईडी के कार्यपालक अभियंता को पेयजल की व्यवस्था तथा सभी बीडीओ को जरूरत के अनुसार शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है.
नाव परिचालन को लेकर भी विशेष सतर्कता
जिलाधिकारी ने एसडीओ सोनपुर को सुरक्षित नाव परिचालन सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया है. सीओ स्तर पर नाव परिचालकों के साथ बैठक कर आवश्यक आदेश जारी करने को कहा गया है. प्रत्येक नाव पर लाइफ जैकेट और इन्फ्लेटेबल ट्यूब उपलब्ध रखना अनिवार्य किया गया है. खतरे के निशान को स्पष्ट रूप से चिन्हित कराने और अंधेरे में नाव का परिचालन नहीं करने का भी निर्देश दिया गया है.
मंगलवार को सभी प्रमुख नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी
बाढ़ नियंत्रण विभाग की रिपोर्ट के अनुसार मंगलवार की सुबह जिले की प्रमुख नदियों के जलस्तर में वृद्धि दर्ज की गयी. घाघरा छपरा का खतरे का निशान 53.68 मीटर है और मंगलवार सुबह जलस्तर 51.84 मीटर दर्ज किया गया. वहीं सिसवन घाघरा का खतरे का निशान 57.04 मीटर है और जलस्तर 56.04 मीटर तक पहुंच गया.
गंडक हाजीपुर का खतरे का निशान 50.32 मीटर है. मंगलवार को यहां जलस्तर 49.43 मीटर दर्ज किया गया. गंडक रेवा का खतरे का निशान 54.41 मीटर है और वर्तमान जलस्तर 53.72 मीटर दर्ज किया गया. गंगा गांधी घाट का खतरे का निशान 48.60 मीटर है और मंगलवार को जलस्तर 49.41 मीटर दर्ज किया गया.
दो से तीन दिन में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद
बाढ़ प्रमंडल, सारण के कार्यपालक अभियंता संतोष कुमार प्रभाकर ने बताया कि नेपाल से पानी आने की स्थिति अभी पूरी तरह थमी नहीं है. वाल्मीकिनगर गंडक बैराज से मंगलवार को भी 1.5 लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया है. पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश जारी रहने के कारण नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव हो सकता है.
उन्होंने कहा कि फिलहाल बहुत ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है. अगले दो से तीन दिनों में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है.
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