Saran News (हरि प्रकाश मिश्रा): सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम कार्य को लेकर चिकित्सकों के बीच चल रहा आंतरिक विवाद अब आम जनता के लिए मुसीबत बन गया है. एनेस्थीसिया विभाग के डॉक्टरों और सर्जन/मेडिसिन डॉक्टरों के बीच छिड़ी इस खींचतान के कारण मंगलवार को सदर अस्पताल में घंटों तक पोस्टमार्टम ठप रहा, जिससे शोक संतप्त परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा.
ड्यूटी से नदारद रहे डॉक्टर, 6 घंटे तक फंसा रहा शव
ताजा मामला तरैया थाना क्षेत्र के पचभिंडा गांव का है. सोमवार रात सड़क दुर्घटना में मृत मनोरमा देवी (पति स्व. प्रभु महतो) का शव पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल लाया गया था. रोस्टर के अनुसार मंगलवार सुबह 10 बजे तक पोस्टमार्टम हो जाना चाहिए था, लेकिन ड्यूटी पर तैनात एनेसथेटिक चिकित्सक डॉ. नलीन विलोचन सूचना के बावजूद अस्पताल नहीं पहुंचे.
अस्पताल कर्मी राजेश कुमार द्वारा बार-बार फोन किए जाने पर भी डॉक्टर टाल-मटोल करते रहे. स्थिति यह रही कि जो पोस्टमार्टम सुबह 10 बजे होना था, वह चिकित्सक की अनुपलब्धता के कारण दोपहर 2 बजे डॉ. धनंजय कुमार द्वारा संपन्न किया गया.
उपाधीक्षक ने कड़ा रुख अपनाते हुए मांगा स्पष्टीकरण
अस्पताल में बढ़ती अव्यवस्था और चिकित्सकों की लापरवाही पर सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. के.एम. दुबे ने सख्त संज्ञान लिया है. उन्होंने ड्यूटी से गायब रहने वाले चिकित्सक डॉ. नलीन विलोचन से लिखित स्पष्टीकरण मांगा है.
उपाधीक्षक द्वारा पूर्व में ही ड्यूटी संबंधी स्पष्ट गाइडलाइन जारी की जा चुकी है. इसके बावजूद एनेस्थीसिया विभाग के कुछ चिकित्सकों द्वारा पोस्टमार्टम कार्य से लगातार दूरी बनाई जा रही है, जो अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है.
डॉक्टरों के बीच आपसी विवाद बना कारण
सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ समय से एनेसथेटिक चिकित्सक डॉ. आलोक कुमार, डॉ. विकास कुमार व अन्य डॉक्टरों द्वारा पोस्टमार्टम ड्यूटी को लेकर आनाकानी की जा रही है. अस्पताल प्रशासन की निष्क्रियता और डॉक्टरों के आपसी टकराव के कारण घंटों तक शव अस्पताल परिसर में पड़ा रहा, जिससे परिजनों का आक्रोश भी देखने को मिला.
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