छपरा नगर निगम बोर्ड की बैठक में जमकर हंगामा, बजट पर विवाद के बीच कार्यवाही स्थगित

Saran News: छपरा नगर निगम की बोर्ड बैठक बजट और विकास कार्यों के खर्च को लेकर हुए विवाद के कारण हंगामे की भेंट चढ़ गई. एक पार्षद को निष्कासित किए जाने के बाद विपक्ष ने बहिष्कार कर दिया. किसी प्रस्ताव पर निर्णय नहीं हो सका और कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी.

Saran News: छपरा नगर निगम की सामान्य बोर्ड बैठक शनिवार को भारी हंगामे की वजह से पूरी नहीं हो सकी. विकास कार्यों, बजट स्वीकृति और कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रस्तावों पर चर्चा के लिए बुलाई गई बैठक विवादों में घिर गई और अंततः कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी. बैठक में महापौर, उपमहापौर, नगर आयुक्त, वार्ड पार्षद, विधायक प्रतिनिधि समेत कई अधिकारी मौजूद थे.

कई अहम प्रस्तावों पर होनी थी चर्चा

बैठक के एजेंडे में पिछली बैठक की कार्यवाही की पुष्टि, नगर निगम का बजट, हाई मास्ट लाइट के बिजली खर्च समेत कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव शामिल थे. शुरुआत में चर्चा सामान्य ढंग से चल रही थी, लेकिन बाद में कुछ मुद्दों को लेकर माहौल गरमा गया.

खर्च का हिसाब मांगने पर बढ़ा विवाद

बैठक के दौरान कुछ पार्षदों ने पिछले वित्तीय वर्ष में हुए विकास कार्यों और खर्च की गई राशि का विस्तृत ब्योरा सदन में प्रस्तुत करने की मांग की. इसी मुद्दे पर दो पार्षदों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई, जो देखते ही देखते हंगामे में बदल गई. सदन का माहौल तनावपूर्ण हो गया और बैठक की कार्यवाही बाधित होने लगी.

एक पार्षद को बैठक से किया गया बाहर

महापौर ने कई बार सदन की मर्यादा बनाए रखने और शांतिपूर्वक चर्चा करने की अपील की, लेकिन स्थिति नियंत्रित नहीं हो सकी. लगातार व्यवधान को देखते हुए नियमों के तहत एक पार्षद को बैठक से निष्कासित कर दिया गया. इसके बाद अन्य पार्षदों ने विरोध शुरू कर दिया और सदन में नारेबाजी होने लगी. कई पार्षद बैठक का बहिष्कार कर बाहर निकल गए.

किसी एजेंडे पर नहीं हो सका निर्णय

लगातार हंगामे के कारण बैठक में रखे गए किसी भी प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका. नगर निगम प्रशासन को अंततः कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी. इससे शहर के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव फिलहाल लंबित रह गए हैं.

महापौर ने विपक्ष पर साधा निशाना

बैठक के बाद महापौर लक्ष्मी राय गुप्ता ने विपक्षी पार्षदों पर विकास कार्यों में बाधा डालने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर हंगामा कर रहे हैं और बजट से जुड़े प्रस्तावों को पारित नहीं होने देना चाहते, जिससे शहर के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं.

विपक्ष ने उठाए पारदर्शिता के सवाल

वहीं पार्षद राजाबाबू चौधरी उर्फ श्याम कुमार और रमाकांत सिंह डब्लू ने कहा कि पिछले वित्तीय वर्ष के खर्च का स्पष्ट लेखा-जोखा सदन के समक्ष नहीं रखा गया. उनका कहना था कि पारदर्शिता के बिना बजट पर चर्चा संभव नहीं है. उन्होंने वित्तीय अनियमितता की आशंका जताते हुए अपने विरोध और बहिष्कार को उचित ठहराया.

अगली बैठक पर टिकी निगाहें

अब नगर निगम की अगली बैठक में लंबित प्रस्तावों और बजट पर दोबारा चर्चा होने की संभावना है. शहर के विकास से जुड़े कई अहम फैसले फिलहाल अधर में लटके हुए हैं.

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लेखक के बारे में

Published by: Nikhil Anurag

मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर पलायन कर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट ( माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय). नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है. नोएडा में टीवी न्यूज में काम करने के बाद हिंदुस्तान ग्रूप होते हुए बिहार, झारखंड की सबसे पसंदीदा अखबार प्रभात खबर में कार्यरत. हां एक बात और... पढ़ने-लिखने की जिज्ञासा कभी खत्म नहीं होगी. साहित्य में बेहद दिलचस्पी.

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