सारण में सूखी पड़ी हैं तरैया की नहरें, सरकारी नलकूप भी हैं बंद, किसानों की बढ़ी परेशानी, कैसे होगी धान की खेती?

Saran News: मानसून पूर्व धान की खेती की तैयारियों के बीच तरैया प्रखंड के किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है. प्रखंड से होकर गुजरने वाली अधिकांश नहरें सूखी पड़ी हैं और उनमें झाड़-झंखाड़ उग आए हैं.

Saran News: (तरैया से मनोज कुमार की रिपोर्ट)
मानसून के पूर्व धान की खेती की तैयारियों के बीच तरैया प्रखंड के किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है. प्रखंड से होकर गुजरने वाली अधिकांश नहरें सूखी पड़ी हैं और उनमें झाड़-झंखाड़ उग आए हैं. दूसरी ओर सरकारी नलकूप भी बंद पड़े हैं. ऐसे में किसान धान के बिचड़े तैयार करने और खेतों में रोपाई की तैयारी को लेकर परेशान हैं.

आसमान से बरस रही आग

भीषण गर्मी और लू के कारण खेत पूरी तरह सूख चुके हैं. खेतों में नमी नहीं होने से धूल उड़ रही है. किसानों का कहना है कि ऐसी स्थिति में धान के बिचड़े डालना संभव नहीं हो पा रहा है. पानी के अभाव में खेती का पूरा चक्र प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है.

अब तक नहीं डाले गए बिचड़े

किसानों ने बताया कि 25 मई से शुरू हुआ रोहिणी नक्षत्र 2 जून तक चलता है और इसे धान के बिचड़े डालने का सबसे उपयुक्त समय माना जाता है. वहीं 15 जून तक बिचड़ा तैयार करने की अंतिम अवधि मानी जाती है. इसके बावजूद पानी की कमी के कारण अब तक अधिकांश किसान बिचड़े नहीं डाल सके हैं.

30 सरकारी नलकूप-लेकिन किसी से नहीं मिल रहा लाभ

सरकारी आंकड़ों के अनुसार तरैया प्रखंड की विभिन्न पंचायतों में करीब 30 सरकारी नलकूप हैं. किसानों का आरोप है कि सभी नलकूप वर्षों से बेकार पड़े हुए हैं और खेतों की सिंचाई में कोई भूमिका नहीं निभा रहे हैं. रखरखाव की कमी और जल निकासी नालों के अभाव में किसानों को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा है.

नहरों में पानी नहीं आने से बढ़ी किसानों की मुश्किलें

किसानों का कहना है कि यदि नहरों में समय पर पानी छोड़ा गया होता तो अब तक धान के बिचड़े तैयार हो चुके होते. लेकिन नहरों के सूखे रहने से खेती की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है. किसानों को आशंका है कि यदि जल्द पानी उपलब्ध नहीं कराया गया तो इस वर्ष धान उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है.

कुव्यवस्था पर किसानों ने उठाए सवाल

स्थानीय किसानों ने कहा कि सरकार कृषि उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय दोगुनी करने के लिए कई योजनाएं चला रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर सिंचाई की मूलभूत व्यवस्था ही चरमराई हुई है. नहरों में पानी और नलकूपों की सुविधा समय पर उपलब्ध नहीं होने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.

समय रहते नहीं मिला पानी तो प्रभावित होगी धान की खेती

किसानों का कहना है कि यदि जल्द नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया और बंद पड़े नलकूपों को चालू नहीं किया गया, तो इस वर्ष धान की खेती गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है. इससे न केवल किसानों की आय पर असर पड़ेगा, बल्कि कृषि उत्पादन भी प्रभावित होने की आशंका है.

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Published by: Sakshi kumari

साक्षी देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की धरती सीवान से आती हैं. पत्रकारिता में करियर की शुरुआत News4Nation के साथ की. 3 सालों तक डिजिटल माध्यम से पत्रकारिता करने के बाद वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल के साथ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार की राजनीति में रुचि रखती हैं. हर दिन नया सीखने के लिए इच्छुक रहती हैं.

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