सारण में दवा दुकानों पर ताला, मरीज परेशान, ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ केमिस्टों का बड़ा आंदोलन

ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में सारण जिले में दवा व्यवसायियों की हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला. जिलेभर की अधिकांश दवा दुकानें बंद रहीं, जिससे मरीजों को भारी परेशानी उठानी पड़ी. दवा विक्रेताओं ने सरकार से ऑनलाइन दवा बिक्री पर सख्त नियंत्रण की मांग की है.

Saran Chemists Protest: (प्रभात किरण हिमांशु) दवा विक्रेताओं की एकदिवसीय हड़ताल का असर पूरे सारण जिले में देखने को मिला. छपरा शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक अधिकांश दवा दुकानें बंद रहीं. इसके कारण मरीजों और उनके परिजनों को जरूरी दवाओं के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा.

दवा मंडी में दिनभर लटका रहा ताला

छपरा शहर के श्री नंदन पथ स्थित दवा मंडी में भी हड़ताल का व्यापक असर दिखा. यहां सभी दवा दुकानों का शटर दिनभर बंद रहा. दवा कारोबार पूरी तरह प्रभावित रहा और जरूरतमंद मरीजों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी.

ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ देशव्यापी बंद

ऑनलाइन दवाओं की बढ़ती बिक्री और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म द्वारा दी जा रही भारी छूट से ऑफलाइन दवा व्यवसायियों में नाराजगी बढ़ रही है. इसी के विरोध में ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट के आह्वान पर देशभर में एकदिवसीय बंद आयोजित किया गया, जिसे बिहार सहित पूरे देश के केमिस्ट एवं ड्रगिस्ट समुदाय ने समर्थन दिया.

दो से तीन करोड़ का कारोबार प्रभावित

सारण जिला औषधि विक्रेता संघ के तत्वावधान में धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया और सभी दवा दुकानों को बंद रखा गया. इस एकदिवसीय हड़ताल के कारण जिले में करीब दो से तीन करोड़ रुपये का दवा कारोबार प्रभावित हुआ.

स्थानीय दवा दुकानदारों के सामने संकट

संगठन के अध्यक्ष अभिषेक कुमार ने कहा कि ऑनलाइन दवा बिक्री से स्थानीय दुकानदारों का कारोबार प्रभावित हो रहा है. उन्होंने बताया कि पूरे जिले में शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन किया गया और सभी दुकानदारों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखे.

अनियंत्रित ऑनलाइन बिक्री पर रोक की मांग

आंदोलन के माध्यम से सरकार से मांग की गई कि दवाओं की अनियमित ऑनलाइन बिक्री पर रोक लगाई जाए. बिना वैध ड्रग लाइसेंस और डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के दवा बिक्री एवं होम डिलीवरी पर नियंत्रण की मांग की गई. साथ ही ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की अत्यधिक छूट नीति पर भी रोक लगाने की मांग उठाई गई.

कोविड में साथ दिया, अब संकट में हैं केमिस्ट

दवा विक्रेताओं ने कहा कि कोविड महामारी के दौरान केमिस्टों ने फ्रंटलाइन स्वास्थ्य सहयोगी के रूप में काम करते हुए लगातार दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की थी. लेकिन आज वही लाइसेंसधारी दवा विक्रेता असमान प्रतिस्पर्धा के कारण संकट में हैं.

इमरजेंसी सेवाओं के लिए कुछ दुकानें खुलीं

हालांकि इमरजेंसी सेवाओं को ध्यान में रखते हुए सदर अस्पताल के सामने कुछ दवा दुकानें खुली रखी गई थीं, ताकि गंभीर मरीजों को दवा मिलने में परेशानी न हो. निजी क्लीनिकों में संचालित मेडिकल स्टोरों पर भी दिनभर भीड़ देखी गई.

मढ़ौरा में भी हड़ताल का व्यापक असर

(मनोकामना सिंह) ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में अनुमंडल क्षेत्र की सभी थोक और खुदरा दवा दुकानें बुधवार को बंद रहीं. मढ़ौरा इकाई के अध्यक्ष जय किशोर सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार की नीति से स्थानीय दवा व्यवसायियों को भारी नुकसान हो रहा है.

केवल ‘जानकी मेडिकल हॉल’ खुला रहा

आपातकालीन स्थिति में मरीजों की सुविधा के लिए अनुमंडलीय अस्पताल के पास स्थित “जानकी मेडिकल हॉल” को खुला रखने का निर्णय लिया गया. पूरे अनुमंडल क्षेत्र में सिर्फ यही एक दुकान संचालित रही.

बैठक में बनी आगे की रणनीति

इस दौरान सोनू सिंह, धर्मवीर सिंह, रामबाबू सिंह और नीरज कुमार समेत कई दवा विक्रेताओं ने बैठक कर सरकार की नीतियों पर चर्चा की और आगे के आंदोलन की रणनीति तैयार की.

तीन सूत्री मांगों को लेकर बंद रहीं दवा दुकानें

(मनोज कुमार) ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एवं बिहार केमिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर बुधवार को तरैया बाजार, पचौड़र बाजार समेत ग्रामीण क्षेत्रों की दवा दुकानें बंद रहीं. दवा व्यवसायियों ने शांतिपूर्ण तरीके से दुकानें बंद कर अपनी मांगों के समर्थन में विरोध प्रदर्शन किया.

ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ एकजुट हुए दुकानदार

तरैया शिवम मेडिकल के संचालक सत्येंद्र सिंह, भूषण ड्रग ट्रेडर्स के संचालक नीरज सिंह उर्फ गोलू सिंह, कृष्णा मेडिकल पचौड़र के संचालक राजीव कुमार सोनी और नवीन मेडिसिन के संचालक सुरेंद्र कुमार सुमन ने बताया कि ऑनलाइन दवा बिक्री से स्थानीय दवा दुकानदारों का व्यवसाय प्रभावित हो रहा है. उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट कंपनियों द्वारा भारी डिस्काउंट की नीति पर रोक लगाने समेत अन्य मांगों को लेकर यह हड़ताल की गई.

दवा नहीं मिलने से मरीजों में बढ़ी परेशानी

दवा दुकानें बंद रहने के कारण मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा. तरैया बाजार, पचौड़र बाजार और आसपास के ग्रामीण इलाकों में लोग दवा के लिए इधर-उधर भटकते नजर आए.

प्रशासन ने नहीं की वैकल्पिक व्यवस्था

दवा दुकानों की हड़ताल के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई थी. सरकारी अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजन भी बाजार में दवा खरीदने के लिए भटकते रहे.

निजी नर्सिंग होम के मरीज भी हुए परेशान

तरैया बाजार और आसपास के क्षेत्रों में संचालित निजी नर्सिंग होम में भर्ती मरीजों के परिजनों को भी दवा, इंजेक्शन और स्लाइन के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ी. कई लोग दवा की तलाश में बंद दुकानों के आसपास घूमते नजर आए.

ग्रामीण क्षेत्रों की छोटी दुकानों की ओर दौड़े लोग

कुछ मरीजों के परिजनों को जब ग्रामीण इलाकों में छोटी दवा दुकानें खुली होने की सूचना मिली, तो वे तत्काल वहां की ओर रवाना हो गए. पूरे दिन दवा के लिए अफरा-तफरी जैसी स्थिति बनी रही.

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Published by: Sakshi kumari

साक्षी देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की धरती सीवान से आती हैं. पत्रकारिता में अपनी करियर की शुरुआत News4Nation के साथ की. 3 सालों तक डिजिटल माध्यम से पत्रकारिता करने के बाद वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल के साथ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार की राजनीति में रुचि रखती हैं. हर दिन नया सीखने के लिए इच्छुक रहती हैं.

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