सारण से नागेंद्र कुमार ओझा की रिपोर्ट
Saran ASHA workers Protest: सारण के पानापुर प्रखंड में 11 माह से मानदेय भुगतान नहीं होने से नाराज आशा कार्यकर्ताओं और आशा फैसिलिटेटरों ने बुधवार को सीएचसी परिसर के सामने प्रदर्शन किया. बिहार राज्य आशा कार्यकर्ता संघ के आह्वान पर आयोजित इस विरोध प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने बकाया भुगतान की मांग करते हुए अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार का ऐलान कर दिया.
क्यों भड़कीं हैं आशा कार्यकर्ता?
बिहार राज्य आशा कार्यकर्ता संघ के आह्वान पर प्रखंड की आशा कार्यकर्ताओं और आशा फैसिलिटेटरों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पानापुर के समक्ष प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें करीब 11 माह से मानदेय का भुगतान नहीं मिला है. इससे उनके सामने आर्थिक संकट गहरा गया है और कई परिवारों के समक्ष रोजमर्रा के खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया है.
आशा कार्यकर्ताओं ने क्या आरोप लगाया?
प्रदर्शन कर रही आशा कार्यकर्ताओं ने बताया कि बिहार राज्य आशा कार्यकर्ता संघ के प्रतिनिधिमंडल ने इस मुद्दे को लेकर राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक से बातचीत की थी. उनका कहना है कि विभाग की ओर से 31 मई 2026 तक सभी लंबित भुगतान करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी मानदेय का भुगतान नहीं किया गया.
कार्य बहिष्कार का फैसला क्यों लिया गया?
आशा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन के बाद सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को आवेदन सौंपा. आवेदन में स्पष्ट किया गया कि जब तक बकाया मानदेय का भुगतान नहीं हो जाता, तब तक आशा कार्यकर्ता और आशा फैसिलिटेटर अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार पर रहेंगे.
स्वास्थ्य सेवाओं पर क्या पड़ सकता है असर?
आशा कार्यकर्ता ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाती हैं. इनके कार्य बहिष्कार से टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की निगरानी, स्वास्थ्य जागरूकता अभियान और अन्य सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं. हालांकि, इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
प्रदर्शन में कौन-कौन शामिल रहीं?
प्रदर्शन में नूतन देवी, नीलम देवी, पुष्पा देवी, रीना देवी, आशा देवी, कांति देवी, अनिता देवी, प्रीति देवी, बेबी देवी, अंशु देवी समेत बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ता और आशा फैसिलिटेटर शामिल रहीं. आशा कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि बकाया मानदेय का भुगतान होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा. अब सभी की नजर स्वास्थ्य विभाग और राज्य सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी है.
