सारण में सफाई कर्मियों की हड़ताल सातवें दिन भी जारी, कचरे के ढेर से बढ़ी बीमारी की आशंका

सारण नगर निकायों में सफाई कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल सातवें दिन भी जारी है. शहर में कचरे का ढेर लग गया है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है. कर्मचारी नियमितीकरण और आउटसोर्सिंग समाप्त करने की मांग पर अड़े हैं.

Saran News: बिहार लोकल बॉडीज एम्प्लाइज फेडरेशन के आह्वान पर कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा की राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल मंगलवार को सातवें दिन भी छपरा नगर निगम सहित जिले के सभी नगर निकायों में जारी रही. हड़ताल के कारण शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है. मोहल्लों, बाजारों और प्रमुख सड़कों पर कचरे का अंबार लग गया है, जिससे लोगों में संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ गई है. शहरवासियों ने सरकार से जल्द पहल कर समस्या का समाधान निकालने की मांग की है.

नगर निगम गेट पर धरना, शहर में प्रदर्शन और नारेबाजी

हड़ताली कर्मचारियों ने नगर निगम कार्यालय के मुख्य गेट पर धरना-प्रदर्शन किया और अपनी तीन सूत्री मांगों के समर्थन में जोरदार नारेबाजी की. आंदोलन के दौरान कई मुख्य सड़कों पर ट्रैक्टर से कूड़ा गिराकर सफाई कर्मियों ने विरोध दर्ज कराया. जैसे-जैसे हड़ताल लंबी खिंच रही है, कर्मचारियों का आक्रोश भी बढ़ता जा रहा है.

महापौर और नगर आयुक्त लगातार कर रहे समझाने का प्रयास

हड़ताल समाप्त कराने के लिए महापौर और नगर आयुक्त लगातार हड़ताली कर्मचारियों और सफाई एजेंसी के कर्मियों से बातचीत कर रहे हैं. हालांकि, दोनों पक्षों के बीच कई स्थानों पर नोकझोंक भी देखने को मिली. हड़ताली कर्मियों का आरोप है कि एजेंसी की गाड़ियों से सफाई कराकर आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है.

कर्मचारियों की प्रमुख मांगें

संघ के अध्यक्ष सियाराम सिंह ने कहा कि वर्षों से कार्यरत दैनिक वेतनभोगी, संविदा और अन्य अस्थायी कर्मचारियों की सेवा नियमित की जाए तथा उनकी सेवा सुरक्षा सुनिश्चित की जाए. कर्मचारियों ने नगर निकायों में लागू ठेका और आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त करने की भी मांग की.

उन्होंने कहा कि जब तक आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त नहीं होती, तब तक कर्मचारियों का वेतन सीधे नगर निकाय द्वारा उनके बैंक खातों में भेजा जाए. साथ ही समान कार्य के लिए समान वेतन और अन्य सेवा लाभ भी उपलब्ध कराए जाएं.

एसीपी-एमएसीपी योजना लागू करने की मांग

फेडरेशन के नेताओं ने नगर निकाय कर्मचारियों को राज्य सरकार के अन्य कर्मचारियों की तरह एसीपी और एमएसीपी योजना का लाभ देने तथा बकाया राशि के भुगतान की मांग दोहराई. उनका कहना है कि वर्षों से पदोन्नति नहीं मिलने से कर्मचारियों की वेतन वृद्धि और सेवा प्रगति प्रभावित हो रही है.

जब तक मांगें पूरी नहीं, तब तक जारी रहेगा आंदोलन

हड़ताल का नेतृत्व कर रहे नेताओं ने स्पष्ट कहा कि जब तक राज्य सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. उनका कहना है कि लंबे समय से मांगों की अनदेखी के कारण कर्मचारियों को हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा है.

शहर की सफाई व्यवस्था पर पड़ा व्यापक असर

हड़ताल के कारण शहर की सफाई व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है. सामान्य दिनों में प्रतिदिन 270 से 300 टन कचरे का उठाव होता है, जबकि बाजारों से ही 50 से 80 टन कचरा निकलता है. इसके लिए करीब 150 वाहनों की जरूरत होती है, लेकिन वर्तमान में 80 से 90 गाड़ियां ही उपलब्ध हैं.

नगर निगम में 350 नियमित और लगभग 650 सफाई एजेंसी के कर्मी कार्यरत हैं. हड़ताल के कारण निगम के 350 कर्मचारी काम पर नहीं हैं, जबकि एजेंसी के कई कर्मचारी भी काम पर नहीं पहुंच रहे हैं. हड़ताली कर्मियों द्वारा एजेंसी की कचरा गाड़ियों को भी कई स्थानों पर निकलने से रोके जाने की बात सामने आई है.

क्या बोले यूनियन के नेता

संघ के अध्यक्ष सियाराम सिंह ने कहा, "जब तक राज्य सरकार हमारी मांगों को नहीं मानती, तब तक हड़ताल समाप्त नहीं होगी. इस बार सरकार को कर्मचारियों की एकजुटता का एहसास कराया जाएगा और सभी मांगें मनवाकर ही आंदोलन खत्म होगा."

क्या बोले महापौर

छपरा नगर निगम के महापौर लक्ष्मी नारायण गुप्ता ने कहा, "राज्य स्तर पर वार्ता चल रही है. उम्मीद है कि जल्द समाधान निकल जाएगा और सफाई कर्मी काम पर लौट आएंगे. सफाई कर्मी नगर निगम परिवार का हिस्सा हैं और उनकी जायज मांगों पर सकारात्मक विचार होना चाहिए."

मुख्य आंकड़े

  • कुल वार्ड : 45
  • सामान्य दिनों में प्रतिदिन कचरा उठाव : 270-300 टन
  • बाजारों से प्रतिदिन निकलने वाला कचरा : 50-80 टन
  • आवश्यक कचरा वाहन : 150
  • वर्तमान में संचालित वाहन : 80-90
  • नगर निगम के कर्मचारी : 350
  • सफाई एजेंसी के कर्मचारी : 650
  • हड़ताल के कारण निगम के 350 कर्मचारी कार्य से दूर
  • एजेंसी के कई कर्मी भी नहीं पहुंच रहे काम पर

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By चंद्रशेखर कुमार

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