Saran News: जिले के इसुआपुर प्रखंड मुख्यालय स्थित ऐतिहासिक लाल दास मठिया परिसर में मंगलवार को महावीरी अखाड़ा के लाइसेंसधारियों और साउंड सिस्टम संचालकों की एक आपात बैठक आयोजित की गई. बैठक में 11 सितंबर को आयोजित महावीरी अखाड़ा सह झंडा मेला के दौरान 14 लाइसेंसधारियों और 14 साउंड संचालकों के खिलाफ स्थानीय प्रशासन द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया गया. उपस्थित सदस्यों ने इसे प्रशासन का एकतरफा और दमनात्मक रवैया करार दिया.
शांतिपूर्ण मेले के बाद भी एफआईआर से नाराजगी
बैठक को संबोधित करते हुए सदस्यों ने कहा कि पूरा मेला अत्यंत शांतिपूर्ण, अनुशासित और आपसी सौहार्द के वातावरण में संपन्न हुआ था. किसी भी स्तर पर कोई अप्रिय घटना या अव्यवस्था नहीं हुई, इसके बावजूद पुलिस-प्रशासन ने दुर्भावनापूर्ण तरीके से निर्दोष अखाड़ा संचालकों और साउंड ऑपरेटरों को नामजद कर दिया. बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर सभी दर्ज मुकदमों को बिना शर्त तुरंत वापस लेने की पुरजोर मांग की गई.
धरना और आमरण अनशन का अल्टीमेटम
लाइसेंसधारियों और ग्रामीणों ने प्रशासन को खुली चेतावनी देते हुए चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा घोषित की:
- एक सप्ताह की मोहलत: प्रशासन यदि सात दिनों के भीतर दर्ज प्राथमिकी वापस नहीं लेता है, तो प्रखंड कार्यालय परिसर में विशाल एक दिवसीय धरना दिया जाएगा.
- अनिश्चितकालीन आमरण अनशन: धरने के बाद भी यदि न्याय नहीं मिला, तो पांचवें दिन से अखाड़ा प्रतिनिधि अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू करेंगे.
- जमानत नहीं लेने का फैसला: प्राथमिकी में नामजद कोई भी लाइसेंसधारी या साउंड संचालक अदालत से जमानत नहीं लेगा, बल्कि सामूहिक गिरफ्तारी देने को तैयार रहेगा.
शांति समिति की बैठकों के बहिष्कार का निर्णय
बैठक में प्रशासनिक रवैये के विरोध में बड़ा फैसला लेते हुए घोषणा की गई कि भविष्य में स्थानीय प्रशासन द्वारा बुलाई जाने वाली किसी भी शांति समिति की बैठक में कोई भी प्रतिनिधि शामिल नहीं होगा.
इस बैठक में प्रमुख रूप से लाइसेंसधारी विजय कुमार सिंह, डॉ. रणवीर सिंह, शत्रुघ्न भगत, पूर्व सैनिक एमडी वारिस, ढोलन सिंह, गोपाल बाबा, विशेश्वर चौरसिया, राजेश सिंह कुशवाहा, राजेंद्र महतो, जयप्रकाश महतो, उमेश राय, भीष्म प्रसाद राय, धर्मेंद्र सिंह, जगन्नाथ सिंह कुशवाहा, टिंकू प्रताप सिंह, रामबाबू राय और अरबिंद सिंह सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे.
