प्रेमचंद जयंती पर सारण में साहित्य का महाकुंभ, क्रांतिकारी गीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां

सारण में मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर साहित्य, संस्कृति और सामाजिक चेतना से जुड़ा एक भव्य समारोह आयोजित किया गया. कार्यक्रम में साहित्यकारों, शिक्षाविदों और विद्यार्थियों ने भाग लिया. जागृति, सिवान की टीम की ओर से क्रांतिकारी गीतों और मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया.

सारण: महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर मंगलवार को शहर स्थित छपरा वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति के प्रांगण में साहित्य, संस्कृति और सामाजिक चेतना से ओत-प्रोत भव्य समारोह का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में साहित्यकारों, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विद्यार्थियों की बड़ी संख्या में भागीदारी रही.

क्रांतिकारी गीत से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

समारोह की शुरुआत जागृति, सिवान की टीम द्वारा प्रस्तुत क्रांतिकारी गीत "ये वक्त की आवाज़ है, मिल के चलो" से हुई. गीत की ओजपूर्ण प्रस्तुति ने पूरे सभागार में जोश और उत्साह का संचार कर दिया. उपस्थित लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का स्वागत और उत्साहवर्धन किया.

दीप प्रज्ज्वलित कर हुआ समारोह का उद्घाटन

कार्यक्रम का उद्घाटन विकल्प के राष्ट्रीय सचिव डॉ. विनोद तथा डॉ. पी.एन. सिंह डिग्री कॉलेज के पूर्व प्राचार्य ओम प्रकाश सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया. अपने संबोधन में वक्ताओं ने मुंशी प्रेमचंद के साहित्य, सामाजिक सरोकारों, मानवीय मूल्यों और यथार्थवादी लेखन पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने कहा कि प्रेमचंद की रचनाएं आज भी समाज को नई दिशा और सकारात्मक सोच प्रदान करती हैं.

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां

जागृति, सिवान की ओर से प्रसिद्ध रंगकर्मी प्रो. दीपक कुमार के नेतृत्व में खुशबू, प्रज्ञा, खुशी, सृष्टि और प्रगति ने एक से बढ़कर एक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं. विशेष रूप से "ओ माझी रे..." गीत की प्रस्तुति ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया. वहीं, दहेज प्रथा के विरोध में अल्पना मिश्रा की प्रेरक प्रस्तुति ने दर्शकों को भावुक कर सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता का संदेश दिया.

प्रेमचंद के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान

कार्यक्रम को राजकीयकृत प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष उदय शंकर गुड्डू, महासचिव तसौवर हुसैन, कैलाश पंडित, जितेंद्र कुमार सिंह, केदार नाथ शर्मा, अधिवक्ता वीरेंद्र कुमार सिंह, साहित्यकार चंद्र भूषण वर्मा, डॉ. राजेश यादव, सुमन गिरी, अमित प्रकाश तथा छात्र नेता शादाब मजहरी सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया. सभी ने मुंशी प्रेमचंद के साहित्य को आज भी समाज के लिए प्रासंगिक बताते हुए उनके विचारों और आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प व्यक्त किया.

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By अमित कुमार

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