Saran News : छपरा नगर निगम में महापौर और पार्षदों के बीच चल रहा विवाद अब राज्य मुख्यालय तक पहुंच गया है. 22 जुलाई को आयोजित बोर्ड बैठक के दौरान हंगामा और कथित अभद्र व्यवहार के आरोप में छह पार्षदों को 60 दिनों के लिए निलंबित किए जाने के बाद मामला और गरमा गया है. महापौर के इस निर्णय के विरोध में 26 पार्षदों ने नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव से मुलाकात कर कार्रवाई रद्द करने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है.
पार्षदों ने लगाया एकतरफा कार्रवाई का आरोप
पार्षद एकता मंच के बैनर तले नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव को दिए गए ज्ञापन में पार्षदों ने कहा कि 22 जुलाई की बोर्ड बैठक में उन्होंने केवल बिहार नगर निगम अधिनियम, 2007 के अनुरूप योजनाओं की सूची उपलब्ध कराने, उनकी समीक्षा कराने तथा प्रस्तावों पर विधिसम्मत मतदान कराने की मांग की थी. उनका आरोप है कि इसी बात से नाराज होकर महापौर ने उन पर "उत्पात, असंसदीय, अलोकतांत्रिक और गैर-जिम्मेदाराना आचरण" का निराधार आरोप लगाते हुए नगर आयुक्त को पत्र भेजा, जिसके आधार पर छह पार्षदों को 60 दिनों तक बोर्ड की बैठकों से वंचित करने की अनुशंसा की गई. पार्षदों ने इसे सदन में बहुमत की आवाज दबाने का प्रयास बताया.
प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन का आरोप
ज्ञापन में पार्षदों ने आरोप लगाया कि नगर आयुक्त ने बिना स्वतंत्र जांच, बैठक की वीडियो रिकॉर्डिंग, कार्यवाही विवरण, उपस्थित सदस्यों के बयान और अन्य अभिलेखों की समीक्षा किए तथा बिना उनका पक्ष सुने कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी. उन्होंने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन बताते हुए महापौर की अनुशंसा पर तत्काल रोक लगाने और किसी स्वतंत्र एजेंसी से उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की. प्रधान सचिव से मिलने वालों में उपमहापौर रागिनी देवी सहित श्वेता पांडेय, रमाकांत सिंह, संजीव रंजन, संतोष कुमार, राजा बाबू चौधरी, खुशी देवी, मीना देवी, उषा देवी समेत 26 पार्षद शामिल थे.
महापौर ने इन छह पार्षदों को किया निलंबित
महापौर लक्ष्मी नारायण गुप्ता ने नगर आयुक्त को भेजे पत्र में कहा था कि 22 जुलाई की बोर्ड बैठक के दौरान कई बार समझाने के बावजूद कुछ पार्षदों ने उत्पातपूर्ण, अलोकतांत्रिक और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार किया, जिससे बैठक की कार्यवाही बाधित हुई और नगर निगम की छवि प्रभावित हुई. इसके आधार पर बिहार नगरपालिका अधिनियम की धारा 52(3) के तहत वार्ड संख्या-6 की श्वेता पांडेय, वार्ड-14 के संजीव रंजन, वार्ड-16 के संतोष कुमार, वार्ड-22 के रमाकांत सिंह, वार्ड-35 के राजा बाबू चौधरी और वार्ड-41 की सुभी देवी को 60 दिनों तक नगर निगम की किसी भी बैठक में भाग लेने से निलंबित करने की अनुशंसा की गई.
विक्षुब्ध पार्षदों ने उठाए सवाल
विक्षुब्ध पार्षदों के नेता एवं वार्ड पार्षद रमाकांत सिंह उर्फ डब्ल्यू ने कहा कि महापौर की ओर से की गई कार्रवाई बिहार नगरपालिका अधिनियम का खुला उल्लंघन है. उन्होंने कहा कि महापौर की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और पूरे मामले से नगर विकास विभाग समेत संबंधित अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है.
नगर आयुक्त ने कही यह बात
नगर आयुक्त रंजीत कुमार ने बताया कि महापौर के आदेश से संबंधित जानकारी सभी संबंधित पार्षदों को दे दी गई है. उन्होंने कहा कि महापौर की अनुशंसा के अनुसार संबंधित पार्षदों को 60 दिनों तक नगर निगम की किसी भी बैठक में भाग नहीं लेने का निर्देश दिया गया है.
महापौर ने कार्रवाई को बताया उचित
महापौर लक्ष्मी नारायण गुप्ता ने कहा कि सदन की कार्यवाही बाधित करने, विकास कार्यों में अनावश्यक अड़चन पैदा करने तथा सदन की मर्यादा के विपरीत आचरण करने के आरोप में छह पार्षदों को 60 दिनों तक नगर निगम की किसी भी बैठक में शामिल होने से निलंबित किया गया है. उन्होंने कहा कि सदन की गरिमा और सुचारु संचालन बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई आवश्यक थी.
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