Chhapra News : मेड इन बिहार का प्रतिनिधित्व करेगा मढ़ौरा, स्थानीय लोगों को रोजगार की आस

Chhapra News : मढौरा में बने रेल इंजन को अफ्रीका भेजने की तैयारी है. सितंबर 2024 में ही इसके लिए करार हुआ था. अब रेल मंत्री के मेड इन बिहार के इंजनों को वैश्विक स्तर पर निर्यात किये जाने के बयान के बाद उम्मीद और अधिक बढ़ गयी है.

मढ़ौरा. मढौरा में बने रेल इंजन को अफ्रीका भेजने की तैयारी है. सितंबर 2024 में ही इसके लिए करार हुआ था. अब रेल मंत्री के मेड इन बिहार के इंजनों को वैश्विक स्तर पर निर्यात किये जाने के बयान के बाद उम्मीद और अधिक बढ़ गयी है. भारतीय रेलवे और बैबटेक लोकोमोटिव प्राइवेट लिमिटेड का संयुक्त उपक्रम निर्यात के लिए लोकोमोटिव तैयार कर रहा है. इसके लिए मढौरा के प्लांट की क्षमता का विस्तार किया गया है. जिससे अफ्रीका को लोकोमोटिव निर्यात किया जा सके. पहली बार इस प्लांट से निर्यात के लिए लोकोमोटिव बनाया जायेगा. वैश्विक उपभोक्ताओं को इस प्लांट से इवोल्यूशन सीरीज की इएस-4 एसीएमआइ लोकोमोटिव की आपूर्ति की जायेगी. इस सीरीज की लोकोमोटिव 4500 एचपी इंजन वाली है. ऊर्जा खपत के मामले में शानदार प्रदर्शन वाले इस लोकोमोटिव को अधिक तापमान में भी आसानी से चलाया जा सकता है. मढ़ौरा प्लांट से इसी वर्ष मई-जून से निर्यात शुरू होने की संभावना जतायी जा रही है.

मेक इन इंडिया को मिल रहा है बढ़ावा

मढ़ौरा प्लांट लोकोमोटिव मैन्युफैक्चरिंग में भारत की वैश्विक स्तर पर पहचान स्थापित कर रहा है. यह सरकार के मेक इन इंडिया पहल को भी बढ़ावा दे रहा है. अफ्रीकी देशों को निर्यात करने के बाद इस प्लांट के लोकोमोटिव की वैश्विक स्तर पर मांग बढ़ेगी. इससे स्थानीय उद्योग मजबूत होंगे और रोजगार के नये अवसर पैदा होंगे. मढ़ौरा प्लांट से अब तक 780 लोकोमोटिव भारतीय रेलवे को मिल चुके है. रेलवे और बैबटेक आगे भी इस प्लांट के क्षमता विकास का काम करते रहेंगे ताकि निर्यात को बढ़ावा दिया जा सके. इस प्लांट की स्थापना वर्ष 2018 में की गयी थी.

स्थानीय लोगों को अब भी रोजगार की आस

भले ही बिहार के मढौरा का यह प्लांट वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है. लेकिन स्थानीय लोगों को अब भी इस प्लांट में रोजगार नहीं मिलने से मायूसी दिख रही है. भाजपा नेता रामबाबू सिंह ने कहा कि यहां के प्लांट में स्थानीय युवकों को रोजगार का कोई अवसर नहीं है. यहां सिर्फ इंजन को इंस्टॉल किया जा रहा है. बाकी सभी सामग्री बाहर से मंगायी जाती है. वहीं स्थानीय जनप्रतिनिधि लालबाबू गिरि ने बताया कि जब से प्लांट बना है. तब से स्थानीय लोगों को रोजगार का कोई अवसर नहीं दिया गया. जिससे निराशा उत्पन्न हुई है. मेड इन बिहार तथा मेक इन इंडिया की परिकल्पना को साकार करने के लिए स्थानीय युवाओं को रोजगार देना होगा.

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Author: ALOK KUMAR

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