कारगिल विजय दिवस के अवसर पर पूरा सारण जिला अपने वीर सपूत नायक विशुनी राय को श्रद्धापूर्वक याद कर रहा है. फील्ड रेजिमेंट के नायक विशुनी राय ने कारगिल युद्ध में मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था. उनकी शहादत ने न केवल सारण बल्कि पूरे बिहार का नाम गौरवान्वित किया. आज भी उनका बलिदान युवाओं के लिए देशभक्ति और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा बना हुआ है.
मकेर के बथुई गांव के लाल ने देश के लिए दी सर्वोच्च कुर्बानी
सारण जिले के मकेर प्रखंड स्थित बथुई गांव के निवासी नायक विशुनी राय कारगिल युद्ध के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए थे. उनकी शहादत की खबर जैसे ही गांव पहुंची, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई. हालांकि गम के साथ-साथ हर किसी के मन में इस बात का गर्व भी था कि गांव का एक बेटा देश की रक्षा करते हुए अमर हो गया.
शहादत के समय दो माह की बेटी थी मां की गोद में
जब नायक विशुनी राय शहीद हुए, उस समय उनकी पत्नी सुशील देवी की गोद में महज दो माह की बेटी थी, जबकि उनका बेटा केवल पांच वर्ष का था. परिवार के लोगों के अनुसार, शहादत की खबर सुनकर पत्नी कुछ देर तक स्तब्ध रह गई थीं. बाद में पूरे परिवार में मातम छा गया. जब उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो आसपास के दो दर्जन से अधिक गांवों के लोग अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े.
सरकारी सहायता मिली, लेकिन कुछ वादे अब भी अधूरे
शहादत के बाद सरकार ने शहीद के परिवार के लिए कई घोषणाएं कीं. परिजनों को पेट्रोल पंप का लाइसेंस मिला और अन्य सरकारी सहायता भी प्रदान की गई. हालांकि पटना में मकान निर्माण के लिए जमीन देने जैसी कुछ महत्वपूर्ण घोषणाएं आज भी पूरी नहीं हो सकी हैं. इसके अलावा मकेर के महावीर चौक पर शहीद की प्रतिमा स्थापित करने और चौक का नाम कारगिल चौक रखने की मांग भी अब तक अधूरी है.
आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा हैं नायक विशुनी राय
नायक विशुनी राय की पत्नी सुशील देवी अपने बच्चों के साथ पटना में रहती हैं. उनके बेटे और बेटी आज बड़े हो चुके हैं और अपने पिता के शौर्य व बलिदान पर गर्व महसूस करते हैं. जब भी परिवार गांव आता है, ग्रामीण शहीद की वीरता की कहानियां सुनाकर उन्हें सम्मानित महसूस कराते हैं. गांव के कई युवा नायक विशुनी राय को अपना आदर्श मानकर सेना में भर्ती होने की तैयारी कर रहे हैं.
स्मृतियों में आज भी जीवित हैं कारगिल के वीर
भले ही कुछ सरकारी घोषणाएं अब तक पूरी नहीं हुई हों, लेकिन नायक विशुनी राय की शहादत आज भी लोगों के दिलों में जीवित है. कारगिल विजय दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए पूरा सारण जिला उनके अदम्य साहस, देशभक्ति और सर्वोच्च बलिदान को नमन करता है.
