लोक भवन के नए निर्देश से फिर चर्चा में जेपीयू का प्राचार्य पदस्थापन विवाद, अटेंडेंस और वेतन पर भी उठे सवाल

JPU Principal Dispute: लोक भवन के नए निर्देशों ने जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा में प्राचार्य पदस्थापन विवाद को फिर गरमा दिया है. नवस्थापित राजकीय डिग्री कॉलेजों के संचालन को लेकर जारी आदेश के बाद पुराने विवाद और शिक्षकों के अटेंडेंस व वेतन पर लगे रोक को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

JPU Principal Dispute: नवस्थापित राजकीय डिग्री कॉलेजों के सुचारु संचालन को लेकर लोक भवन की ओर से जारी नए निर्देश के बाद जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा में पूर्व में हुए प्राचार्य पदस्थापन और उससे जुड़े विवाद का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है. लोक भवन सचिवालय के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने 18 अगस्त 2026 को बिहार के संबंधित विश्वविद्यालयों को पत्र जारी कर नवस्थापित 211 राजकीय डिग्री कॉलेजों के शैक्षणिक और प्रशासनिक संचालन को लेकर तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है.

नवस्थापित कॉलेजों के संचालन को लेकर राजभवन का निर्देश

लोक भवन की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि नवस्थापित राजकीय डिग्री कॉलेजों में शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियों का सुचारु संचालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए. जिन कॉलेजों में प्राचार्य की नियुक्ति या पदस्थापन से संबंधित स्थिति स्पष्ट नहीं है, वहां वैकल्पिक व्यवस्था के तहत प्राचार्य का अतिरिक्त प्रभार दिया जा सकता है.

निर्देश के अनुसार, यदि किसी नवस्थापित राजकीय डिग्री कॉलेज में पदस्थापित प्राचार्य ने योगदान नहीं किया है अथवा किसी वैध और उचित कारण से प्राचार्य का पद उपलब्ध नहीं है, तो संबंधित विश्वविद्यालय किसी विद्यमान घटक महाविद्यालय के प्राचार्य अथवा एसोसिएट प्रोफेसर को प्राचार्य का अतिरिक्त प्रभार दे सकता है.

जेपीयू में पहले हुआ था प्राचार्यों का पदस्थापन

गौरतलब है कि जयप्रकाश विश्वविद्यालय के कुछ शिक्षकों को पूर्व में नवस्थापित राजकीय डिग्री कॉलेजों में प्राचार्य के रूप में पदस्थापित किया गया था. पदस्थापन के बाद कुछ शिक्षकों ने इसे लेकर आपत्ति और शिकायत दर्ज करायी थी. मामला न्यायालय तक भी पहुंचा था.

पदस्थापन के बावजूद संबंधित नवस्थापित कॉलेज में योगदान नहीं करने वाले कुछ शिक्षकों के विश्वविद्यालय स्तर पर अटेंडेंस बनाने पर रोक लगा दी गयी थी. इसके साथ ही उनके वेतन भुगतान को भी रोक दिया गया था. इस कार्रवाई को लेकर संबंधित शिक्षकों की ओर से भी आपत्ति जतायी गयी थी.

लोक भवन के निर्देश के बाद कई सवाल

अब लोक भवन की ओर से नवस्थापित कॉलेजों के संचालन को लेकर जारी ताजा निर्देश के बाद जेपीयू प्रशासन के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े हो गये हैं. इनमें सबसे प्रमुख यह है कि जिन शिक्षकों को प्राचार्य के रूप में पदस्थापित किया गया था, उन्होंने किन परिस्थितियों में संबंधित कॉलेजों में योगदान नहीं किया.

इसके अलावा उनकी ओर से की गयी शिकायतों और न्यायालय में चल रही कार्यवाही की वर्तमान स्थिति क्या है, यह भी महत्वपूर्ण है. वहीं, शिक्षकों के अटेंडेंस पर रोक लगाने और वेतन बंद करने का विश्वविद्यालय का निर्णय किन नियमों और परिस्थितियों के आधार पर लिया गया था, इसे लेकर भी स्थिति स्पष्ट किए जाने की मांग उठ रही है.

शिक्षकों ने निष्पक्ष समीक्षा की उठायी मांग

संबंधित शिक्षकों का कहना है कि राजभवन के ताजा निर्देश के आलोक में विश्वविद्यालय प्रशासन को पूरे मामले की निष्पक्ष और विधिसम्मत समीक्षा करनी चाहिए. उनका कहना है कि पदस्थापन, योगदान, अटेंडेंस और वेतन से जुड़े सभी पहलुओं को एक साथ देखते हुए स्पष्ट निर्णय लिया जाना चाहिए.

शिक्षकों की ओर से यह भी कहा जा रहा है कि यदि किसी शिक्षक के खिलाफ अटेंडेंस और वेतन रोकने की कार्रवाई की गयी है तो उसकी वैधानिक स्थिति भी स्पष्ट होनी चाहिए.

अब जेपीयू प्रशासन के फैसले पर नजर

लोक भवन के निर्देश के बाद अब जयप्रकाश विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस मामले में क्या कदम उठाया जाता है, इस पर सबकी नजर है. विश्वविद्यालय को नवस्थापित राजकीय डिग्री कॉलेजों में शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ ही पूर्व के पदस्थापन विवाद से जुड़े मामलों पर भी निर्णय लेना होगा.

ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में जेपीयू प्रशासन संबंधित शिक्षकों के पदस्थापन, योगदान और कॉलेजों में प्राचार्य की वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर आवश्यक निर्णय ले सकता है. इससे नवस्थापित कॉलेजों के संचालन के साथ-साथ लंबे समय से चर्चा में रहे प्राचार्य पदस्थापन विवाद की दिशा भी स्पष्ट होने की उम्मीद है.

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By प्रभात किरण हिमांशु

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