Chhapra News : जिले में चल रहे अवैध निजी नर्सिंग होम व जांच घर, लेकिन नहीं हो रही कार्रवाई

Chhapra News : जिले में इस समय चार सौ से अधिक अवैध निजी क्लीनिक, जांच घर, लैब और नर्सिंग होम संचालित हो रहे हैं, जिनमें इलाज के नाम पर भारी अनियमितताएं और लापरवाही हो रही है.

छपरा. जिले में इस समय चार सौ से अधिक अवैध निजी क्लीनिक, जांच घर, लैब और नर्सिंग होम संचालित हो रहे हैं, जिनमें इलाज के नाम पर भारी अनियमितताएं और लापरवाही हो रही है. इन क्लीनिकों की जांच और सीलिंग के लिए प्रशासन द्वारा पिछले वर्ष अगस्त माह में एक अभियान चलाया गया था, जिसमें 20 से अधिक क्लीनिकों और लैब्स को सील कर दिया गया था. हालांकि, उसके बाद से अब तक कोई बड़ा अभियान नहीं चलाया गया और ऐसे अवैध संस्थानों का संचालन लगातार बढ़ता जा रहा है.

यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब इलाज के नाम पर मरीजों से बड़ी रकम वसूली जा रही है, लेकिन इसके बावजूद उनकी हालत में कोई सुधार नहीं होता. हाल ही में बनियापुर थाना क्षेत्र में राजमती देवी नामक मरीज से महज 24 घंटे में 60 हजार रुपये वसूल किये गये, लेकिन उनका इलाज नहीं हो पाया. इसी तरह, गोपेश्वर नगर स्थित एक निजी अस्पताल में रिविलगंज के सेमरिया गांव निवासी अनिल कुमार प्रसाद की पत्नी से लाखों रुपये ऐंठे गये, लेकिन हालत बिगड़ने पर उन्हें पटना के निजी अस्पताल भेजा गया, जहां से बिना समुचित इलाज के ही उन्हें वापस छपरा सदर अस्पताल भेज दिया गया. अंततः सदर अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गयी. इन अवैध निजी क्लीनिकों और नर्सिंग होमों में मरीजों को भेजने की प्रक्रिया में कई अनियमितताएं पायी गयीं और एक क्लीनिक को सील करने का आदेश भी दिया गया.

कार्रवाई नहीं होने से संचालकों में नहीं है भय

यह कोई इकलौता मामला नहीं है. कुछ दिन पहले ही मलखाना चौक स्थित एक निजी नर्सिंग होम में इलाज के दौरान एक महिला की मौत हो गयी थी, लेकिन वहां भी कोई कार्रवाई नहीं हुई. दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति बन गयी और मामला आगे नहीं बढ़ सका. नर्सिंग होम आज भी चालू है और कोई कार्रवाई न होने के कारण संचालकों में भय का माहौल नहीं है.

सदर अस्पताल बन गया है दलालों का अड्डा

सदर अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को अक्सर निजी क्लीनिकों और नर्सिंग होमों में रेफर कर दिया जाता है, जहां उनसे मोटी रकम वसूली जाती है. अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में तैनात कुछ चिकित्सक खुद दलालों के संपर्क में रहते हैं और मरीजों को बिना उचित इलाज के निजी क्लीनिकों में भेज देते हैं. कई बार तो मरीजों को डॉक्टर के पास जाने तक का मौका नहीं मिलता और एंबुलेंस में ही सीधे क्लीनिक भेज दिया जाता है.

कार्रवाई के लिए एक टीम का किया गया है गठन

कार्रवाई के लिए एक टीम का गठन किया गया है. कुछ माह पूर्व अभियान चलाया गया था. जिसमें शहरी क्षेत्र के अलावा ग्रामीण इलाकों में भी छापेमारी कर अवैध निजी नर्सिंग होम को सील किया गया. शहर में भी कुछ ऐसे क्लीनिक हैं. जो मानकों को नजर अंदाज कर चलाये जा रहे हैं. इस संदर्भ में जिला प्रशासन को भी सूचना दी गयी है. इसके बाद से कार्रवाई भी प्रारंभ हुई है.

डॉ सागर दुलाल सिन्हा, सिविल सर्जन

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Author: ALOK KUMAR

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