Saran News : राजकीय कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय, छपरा में स्थापित स्पेस एंड एस्ट्रोनॉमी लैब के प्रभावी संचालन और शैक्षणिक उपयोग को लेकर चल रहा विशेष शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हो गया. प्रशिक्षण के अंतिम दिन रसायन विज्ञान और भूगोल के कुल 216 शिक्षकों को अंतरिक्ष एवं खगोल विज्ञान से जुड़ी गतिविधियों, प्रयोगात्मक शिक्षण और लैब में उपलब्ध आधुनिक तकनीकी संसाधनों के शैक्षणिक उपयोग का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया.
पुस्तकीय ज्ञान से आगे प्रयोग आधारित पढ़ाई पर जोर
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को विषय-वस्तु को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय प्रयोग, अवलोकन, गतिविधि, मॉडल और तकनीक के माध्यम से विद्यार्थियों तक पहुंचाने के लिए तैयार करना रहा. इस दौरान विभिन्न विषयों को अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीक से जोड़कर पढ़ाने की संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गयी.
लैब को गतिविधि आधारित शिक्षण का केंद्र बनाने पर जोर
डॉ. नसीम अख्तर ने कहा कि स्पेस एंड एस्ट्रोनॉमी लैब को केवल उपकरणों के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए. इसे अंतरविषयक और गतिविधि आधारित शिक्षण का केंद्र बनाया जा सकता है. रसायन विज्ञान, भूगोल, जीव विज्ञान और भौतिक विज्ञान की अवधारणाओं को अंतरिक्ष विज्ञान से जोड़कर विद्यार्थियों में वैज्ञानिक जिज्ञासा, तार्किक चिंतन और अनुसंधान की प्रवृत्ति विकसित की जा सकती है.
एस्ट्रोकेमिस्ट्री से समझेंगे अंतरिक्ष की रासायनिक संरचना
गौरव सिन्हा ने एस्ट्रोकेमिस्ट्री की अवधारणाओं पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष में पाए जाने वाले तत्वों, अणुओं और विभिन्न खगोलीय पिंडों की रासायनिक संरचना को रसायन विज्ञान से जोड़कर विद्यार्थियों को रोचक तरीके से समझाया जा सकता है.
टेलीस्कोप से आकाशीय पिंडों का होगा प्रत्यक्ष अवलोकन
अनूप कुमार शर्मा ने टेलीस्कोप और जेट विमान से संबंधित गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया. उन्होंने कहा कि टेलीस्कोप के माध्यम से विद्यार्थियों को आकाशीय पिंडों का प्रत्यक्ष अवलोकन कराया जा सकता है, जिससे अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति उनकी रुचि और जिज्ञासा को बढ़ावा मिलेगा.
स्पेस साइंस में बायोटेक्नोलॉजी की भूमिका समझी
अमृता कुमारी गुप्ता ने जेनेटिक इंजीनियरिंग और बायोटेक्नोलॉजी इन स्पेस साइंस के महत्व पर चर्चा की. उन्होंने बताया कि आधुनिक विज्ञान में जैव प्रौद्योगिकी और आनुवंशिक अभियांत्रिकी की भूमिका तेजी से बढ़ रही है और इनके माध्यम से अंतरिक्ष विज्ञान को भी विद्यार्थियों के लिए बेहतर तरीके से समझाया जा सकता है.
विद्यार्थियों की जिज्ञासा को वैज्ञानिक दिशा देने पर जोर
उदयभान शर्मा ने खगोलीय विज्ञान के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विद्यार्थियों में आकाशीय घटनाओं को लेकर स्वाभाविक जिज्ञासा होती है. इस जिज्ञासा को वैज्ञानिक अध्ययन और अनुसंधान की दिशा देना आवश्यक है. उन्होंने गतिविधि आधारित शिक्षण को इसके लिए प्रभावी माध्यम बताया.
प्रशिक्षण में शिक्षकों ने लिया व्यावहारिक अनुभव
प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को लैब में उपलब्ध संसाधनों और तकनीकी उपकरणों के शैक्षणिक उपयोग की जानकारी दी गयी. उद्देश्य यह रहा कि शिक्षक प्रशिक्षण के बाद विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े विषयों को प्रयोग और गतिविधियों के माध्यम से समझा सकें.
कार्यक्रम में कई विशेषज्ञों ने किया संबोधित
कार्यक्रम के दौरान विष्णु कुमार, धीरज आनंद समेत अन्य विशेषज्ञों ने भी शिक्षकों को संबोधित किया. प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन के साथ शिक्षकों को स्पेस एंड एस्ट्रोनॉमी लैब के संसाधनों का कक्षा शिक्षण में प्रभावी उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया.
