EOU Raid In Saran: आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की राज्य स्तरीय टीम ने सारण जिले के पूर्व जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (माध्यमिक शिक्षा) अजीत अमर हरिजन के सिवान स्थित पैतृक आवास समेत चार ठिकानों पर शुक्रवार को एक साथ छापेमारी की. EOU ने प्रेस विज्ञप्ति के जरिए बताया कि सहरसा में पदस्थापित तत्कालीन डीपीओ अजीत अमर के खिलाफ अवैध संपत्ति अर्जन के मामले में EOU थाना कांड संख्या-17/26 दर्ज किया गया है. विशेष न्यायालय (निगरानी), उत्तर बिहार, मुजफ्फरपुर से सर्च वारंट प्राप्त कर पुलिस उपाधीक्षकों के नेतृत्व में उनके 04 अलग-अलग ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया गया.
जांच के दौरान अभियुक्त के खिलाफ शुरुआती तौर पर ₹62,20,550 की आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का ठोस साक्ष्य मिला है, जो उनकी वैध आय से लगभग 72.35% अधिक है. EOU की टीमों ने 7 अगस्त को एक साथ सीवान के दरौंधा थाना क्षेत्र स्थित रैनी गांव के पैतृक मकान, सहरसा के नया बाजार स्थित किराए के मकान, सहरसा स्थित कार्यालय कक्ष और छपरा के गंडक कॉलोनी स्थित सरकारी आवास पर छापेमारी शुरू की.
3 महीने के अंदर गठित हुए थे दो आरोप पत्र
भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति के आरोपित पूर्व डीपीओ के खिलाफ जिला लोक शिकायत निवारण कोषांग के फैसले के बाद सारण जिलाधिकारी ने 24 अप्रैल 2026 को ही शिक्षा विभाग के निदेशक (प्रशासन) को प्रपत्र 'क' (आरोप पत्र) भेज दिया था. जब विभाग स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई, तो जिलाधिकारी ने उप विकास आयुक्त (DDC) के नेतृत्व में 6 सदस्यीय जांच टीम गठित की. जांच रिपोर्ट आने के बाद 17 जून को जिलाधिकारी ने 266 पन्नों का पूरक आरोप पत्र निदेशालय को सौंपा था.
32 महीने तक दूसरे जिले में प्रतिनियुक्ति पर जमे रहे अधिकारी
स्थानीय शिक्षाविदों और लोगों के बीच इस बात की चर्चा है कि सामान्य कर्मचारियों के 30-60 दिनों के प्रतिनियुक्ति विस्तार पर ही कार्रवाई होने लगती है, लेकिन यह अधिकारी 32 महीनों तक मूल पदस्थापना से अलग दूसरे जिले में प्रतिनियुक्ति पर डटे रहे. इस दौरान उनकी कार्यशैली और अवैध कमाई में विभाग के अन्य लोगों और कड़ियों की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है.
निलंबन की जगह सिर्फ तोड़ी गई प्रतिनियुक्ति
जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव की ओर से भ्रष्टाचार के गंभीर साक्ष्य भेजे जाने के बावजूद विभाग ने डीपीओ को निलंबित या बर्खास्त करने के बजाय केवल उनकी प्रतिनियुक्ति रद्द की. सूत्रों के अनुसार, ऊंचे रसूख और विभागीय अधिकारियों तक पहुंच के कारण मामले को टालने का प्रयास किया गया था. 6 महीने से मामला प्रकाश में रहने के बाद भी सख्त विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई अधर में लटकी रही.
प्रभात खबर की खबर का दिखा बड़ा असर
'प्रभात खबर' ने 28 जून के अंक में इस पूरे मामले और डीपीओ की आय से अधिक संपत्ति की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था. इसके बाद राज्य प्रशासनिक महकमे में हलचल मची. 29 जून को कबीर जयंती की सरकारी छुट्टी के दिन ही शिक्षा विभाग के निदेशक (प्रशासन) को पूर्व डीपीओ की प्रतिनियुक्ति समाप्त करने का आदेश जारी करना पड़ा था.
