छपरा. शहर में कुछ वर्षों में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ा है. धूल और धुएं के बीच लोगों का सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है. शहरी इलाके में वायु प्रदूषण में हो रही वृद्धि आने वाले समय में शहरवासियों के लिए एक बड़ी समस्या खड़ी कर सकती है. सड़कों पर बढ़ती वाहनों की संख्या और उससे निकलने वाला धुंआ, रिहायशी इलाकों में डंप किया जा रहा कचरा, साफ-सफाई की कमी व निर्माण वाले इलाकों में लगातार उड़ रही धूल शहरवासियों के फेंफड़ो को संक्रमित कर रहा है. वायु प्रदूषण स्वास्थ्य पर तो असर डाल ही रहा है साथ ही साथ लोगों की कार्यक्षमता को भी प्रभावित कर रहा है. शहर में दर्जनों रिहायशी इलाके हैं. जहां कचरे की डंपिंग की जाती है. इनमें गीला व सूखा दोनों प्रकार का कचरा शामिल है. गीला कचरा सूखकर तेज हवाओं के साथ सीधे लोगों के घरों तक प्रवेश करता है. इसके साथ ही सड़कों पर जमा हुए धूल भी तेज हवाओं के साथ सीधे लोगों के फेंफडों तक पहुंच रहे हैं. शहरी क्षेत्र की लगभग ढाई लाख की आबादी धीरे-धीरे सांस के रोग से ग्रसित होते जा रही है.
ग्रीन जोन का निर्माण अधूरा
शहर के वातावरण को शुद्ध बनाने के उद्देश्य से अमृत योजना के तहत मुहल्लों में चिह्नित जगहों पर ग्रीन जोन का निर्माण किया जाना है. लेकिन विगत दो वर्षों से यह कार्य पेंडिंग में है. शहर की हरियाली को वापस लाने का प्रयास धीमा है. शहरी इलाकों के तेजी से हो रहे आधुनिकीकरण के बीच पेड़-पौधों की संख्या कम होते जा रही है. निर्माण की आपाधापी में शहरी इलाके में पेड़ अंधाधुंध तरीके से काटे जा रहे हैं. वहीं शहर के कई ऐसे मुहल्लों में भी ग्रीन जोन बनाने का प्रस्ताव नगर निगम स्टैंडिंग कमेटी की बैठकों में आया था. लेकिन, अबतक इस दिशा में कोई कारगर कदम नहीं उठाया जा सका है.फेंफड़े और आंखों पर हो रहा असर
वायु प्रदूषण के कारण स्वांस रोगियों की संख्या बढ़ रही है. सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ आरएन तिवारी ने बताया कि जिस प्रकार शहरी क्षेत्र में वायु प्रदूषण का ग्राफ बढ़ा है. उससे 40 वर्ष के उम्र के प्रायः सभी लोगों को सांस रोग की थोड़ी बहुत समस्या शुरू हो सकती है. 15 साल से कम के बच्चों में ब्रोंकाइटिस तथा स्नोफीलिया जैसी बीमारी का खतरा बना हुआ है. धूल व धुंआ के कारण नेत्र रोग की भी समस्या बढ़ी है. ज्यादातर आई डिजिट वायु प्रदूषण के कारण ही हो रहे हैं. पेट्रोल के धुएं और सड़कों पर उड़ने वाली धूल सीधे लोगों के आंखो में प्रवेश करती है. लगातार धूल पड़ने के कारण आंखों की उपरी परत में ड्राइनेस आ जाता है और आंखों में जलन तथा आंख में खुजली आदि की समस्या बढ़ने लगती है.क्या कहते हैं जिम्मेदार
शहरी क्षेत्र में बढ़ रहे प्रदूषण के ग्राफ को कम करने के लिए प्रयास किये जा रहे हैं. पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए चौक-चौराहों पर ग्रीन जोन का निर्माण होगा. साफ-सफाई की व्यवस्था में भी काफी सुधार हुआ है. लक्ष्मी नारायण गुप्ता, मेयर, छपरा नगर निगमडिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
