छपरा में किडनी मरीजों को बड़ी राहत, मढ़ौरा-सोनपुर में शुरू हुई डायलिसिस सेवा; अब 3 सरकारी अस्पतालों में सुविधा

किडनी रोगियों को अब डायलिसिस के लिए लंबी यात्रा नहीं करनी पड़ेगी. सारण के मढ़ौरा और सोनपुर अनुमंडलीय अस्पतालों में डायलिसिस सेवा शुरू हो गई है। इससे ग्रामीण मरीजों के समय, धन और शारीरिक परेशानी में कमी आएगी.

Saran News: किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए सप्ताह में दो से तीन बार डायलिसिस कराना जीवन की अनिवार्य जरूरत होती है. लेकिन ग्रामीण इलाकों के मरीजों के लिए अब तक यह इलाज किसी चुनौती से कम नहीं था. डायलिसिस कराने के लिए उन्हें बार-बार छपरा सदर अस्पताल, पटना या निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता था, जिससे समय और धन दोनों की भारी बर्बादी होती थी. स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीण मरीजों की इस समस्या का समाधान करते हुए मढ़ौरा अनुमंडलीय अस्पताल में पांच बेड और सोनपुर अनुमंडलीय अस्पताल में तीन बेड की डायलिसिस सेवा शुरू कर दी है. इसके साथ ही जिले में अब सदर अस्पताल सहित तीन सरकारी अस्पतालों में डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध हो गई है.

ग्रामीण मरीजों की सबसे बड़ी परेशानी हुई दूर

किडनी रोगियों के लिए नियमित डायलिसिस बेहद जरूरी होती है. पहले मढ़ौरा, तरैया, मशरक, पानापुर, अमनौर, इसुआपुर, सोनपुर, दरियापुर, दिघवारा और नयागांव जैसे क्षेत्रों के मरीजों को इलाज के लिए लंबी यात्रा करनी पड़ती थी. अब मढ़ौरा और सोनपुर अनुमंडलीय अस्पतालों में सेवा शुरू होने से मरीजों का समय, पैसा और शारीरिक परेशानी तीनों कम हो गई है. विशेष रूप से बुजुर्ग मरीजों को इसका सबसे अधिक लाभ मिल रहा है.

बिहार का पहला अनुमंडलीय अस्पताल बना था मढ़ौरा

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अनुमंडलीय स्तर पर बिहार में सबसे पहले मढ़ौरा अनुमंडलीय अस्पताल में ही डायलिसिस सेवा शुरू की गई थी. यह सेवा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर संचालित की जा रही है, ताकि मरीजों को आधुनिक मशीनों और प्रशिक्षित तकनीशियनों के माध्यम से बेहतर इलाज मिल सके.

सदर अस्पताल में हर महीने 1500 से अधिक डायलिसिस सेशन

छपरा सदर अस्पताल में पहले से 20 बेड का आधुनिक डायलिसिस यूनिट संचालित हो रहा है. अस्पताल प्रबंधक राजेश्वर प्रसाद ने बताया कि यहाँ प्रत्येक माह करीब 170 मरीजों का लगभग 1500 डायलिसिस सेशन किया जाता है. आर्थिक रूप से कमजोर बीपीएल कार्डधारियों को यह सुविधा पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराई जाती है. जिन मरीजों के पास बीपीएल कार्ड नहीं है, उनके लिए भी सरकारी दर पर मात्र ₹1,784 प्रति डायलिसिस में इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि निजी अस्पतालों में इसके लिए कई गुना अधिक राशि खर्च करनी पड़ती है.

हर महीने सैकड़ों मरीज उठा रहे लाभ

जिला स्वास्थ्य समिति के जिला कार्यक्रम प्रबंधक अरविंद कुमार ने बताया कि सदर अस्पताल में प्रतिमाह लगभग 170 मरीजों के 1500 डायलिसिस सेशन किए जाते हैं. मढ़ौरा अनुमंडलीय अस्पताल में करीब 35 मरीजों के 242 डायलिसिस सेशन होते हैं. सोनपुर अनुमंडलीय अस्पताल में हर महीने 10 मरीजों के 72 डायलिसिस सेशन किए जा रहे हैं. मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए भविष्य में अनुमंडलीय अस्पतालों में डायलिसिस बेड की संख्या बढ़ाने की योजना है.

क्या कहते हैं अधिकारी

स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य प्रत्येक जरूरतमंद मरीज तक गुणवत्तापूर्ण डायलिसिस सेवा पहुंचाना है. मरीजों की सुविधा को देखते हुए भविष्य में अनुमंडलीय अस्पतालों में डायलिसिस यूनिट का विस्तार और बेड क्षमता बढ़ाई जाएगी, ताकि किसी भी मरीज को इलाज के लिए जिले से बाहर नहीं जाना पड़े.

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By प्रभात किरण हिमांशु

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