Safe Motherhood: एक समय था, जब गांवों में प्रसव के लिए परिवारों की पहली पसंद घर हुआ करता था. स्वास्थ्य केंद्र तक जाने में झिझक, सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं को लेकर धारणा और वर्षों से चली आ रही सामाजिक मान्यताओं के कारण कई महिलाएं घर पर ही बच्चे को जन्म देती थीं. अब स्थिति बदल रही है. ग्रामीण महिलाओं में जागरूकता बढ़ने के साथ संस्थागत प्रसव के प्रति भरोसा भी मजबूत हुआ है. महिलाएं अब प्रसव के लिए स्वास्थ्य संस्थान को अधिक सुरक्षित विकल्प मान रही हैं.
रिविलगंज प्रखंड के मैनपुरा गांव में आयोजित सामुदायिक बैठक में महिलाओं के संवाद से यह बदलाव सामने आया. बैठक में महिलाओं ने बताया कि अब गांव की महिलाएं प्रसव के लिए घर को प्राथमिकता नहीं देतीं. जरूरत पड़ने पर वे स्वास्थ्य केंद्र जाती हैं और मां तथा बच्चे की सुरक्षा को प्राथमिकता देती हैं.
यह बदलाव लगातार चल रहे सामुदायिक संवाद और जागरूकता अभियानों का परिणाम बताया गया. आशा कार्यकर्ताओं, आशा संगिनी, जीविका समूह, स्वास्थ्य विभाग, पेशेंट स्टेकहोल्डर प्लेटफॉर्म के सदस्यों और समुदाय के बीच लगातार संवाद से महिलाओं में संस्थागत प्रसव को लेकर जागरूकता बढ़ी है.
पहले घर था विकल्प, अब अस्पताल पर भरोसा
बैठक में महिलाओं ने बताया कि कुछ वर्ष पहले गांव में घर पर प्रसव होना सामान्य बात माना जाता था. स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी का अभाव भी इसकी बड़ी वजह थी. कई परिवारों को यह जानकारी नहीं थी कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव के दौरान कई जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करायी जाती हैं.
आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्यकर्मियों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व जांच, टीकाकरण, संस्थागत प्रसव और प्रसव के दौरान संभावित जटिलताओं की जानकारी मिलने लगी. इससे परिवारों की सोच में बदलाव आया.
महिलाओं ने कहा कि स्वास्थ्य संस्थान में प्रसव के दौरान यदि किसी तरह की जटिलता सामने आती है, तो प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी और चिकित्सक तत्काल उपचार उपलब्ध करा सकते हैं. यही भरोसा अब उन्हें घर की बजाय स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचा रहा है.
पेशेंट स्टेकहोल्डर प्लेटफॉर्म की भूमिका अहम
इस बदलाव में पेशेंट स्टेकहोल्डर प्लेटफॉर्म के सदस्यों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है. सामुदायिक बैठक में प्लेटफॉर्म के सदस्यों ने महिलाओं और स्वास्थ्य विभाग के बीच संवाद का माध्यम बनकर काम किया.
उन्होंने समुदाय में संस्थागत प्रसव को लेकर मौजूद अनुभवों, समस्याओं और भ्रांतियों को सामने रखा. सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में मिलने वाली सुविधाओं, प्रसव के दौरान आने वाली परेशानियों और रेफरल की स्थिति पर भी चर्चा की गयी. इन मुद्दों को स्वास्थ्यकर्मियों के सामने रखकर महिलाओं को आवश्यक जानकारी दी गयी.
46 लोगों ने लिया हिस्सा
आयुष्मान आरोग्य मंदिर, बिरम परसा में आयोजित बैठक में कुल 46 लोगों ने भाग लिया. इनमें बड़ी संख्या महिलाओं की थी. बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी जानकारी देने के साथ महिलाओं को अपनी पुरानी धारणाओं, शिकायतों और आशंकाओं को खुलकर रखने का अवसर मिला.
स्वास्थ्यकर्मी ने बतायी व्यवस्था
बैठक में सीएचओ शिवा महतो ने महिलाओं के सवालों का जवाब दिया. उन्होंने बताया कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में जरूरी दवाओं और प्रशिक्षित स्टाफ नर्स तथा चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है.
उन्होंने बताया कि गर्भवती महिला को गंभीर अथवा हाई-रिस्क स्थिति होने पर ही उच्च स्वास्थ्य केंद्र रेफर किया जाता है. उन्होंने महिलाओं से अपील की कि रेफरल की स्थिति में सरकारी व्यवस्था के तहत सदर अस्पताल में इलाज को प्राथमिकता दें, ताकि अनावश्यक आर्थिक बोझ से बचा जा सके.
