250 पहिये जायेंगे हरनौत

उत्पादन. कारखाने में शुरू हुआ यात्री ट्रेनों के लिए पहिये का निर्माण 24 मई 2016 को हुआ था यात्री ट्रेनों के पहियों के निर्माण का पहला ट्रायल छपरा/दिघवारा : सारण के बेला में लगभग 1500 करोड़ की लागत से निर्मित देश के दूसरे रेल पहिया कारखाना में आज उपलब्धि का नया अध्याय जुड़ने वाला है. […]

उत्पादन. कारखाने में शुरू हुआ यात्री ट्रेनों के लिए पहिये का निर्माण

24 मई 2016 को हुआ था यात्री ट्रेनों के पहियों के निर्माण का पहला ट्रायल
छपरा/दिघवारा : सारण के बेला में लगभग 1500 करोड़ की लागत से निर्मित देश के दूसरे रेल पहिया कारखाना में आज उपलब्धि का नया अध्याय जुड़ने वाला है. मालगाड़ी के पहियों के सफलतम उत्पादन के बाद अब कारखाना ने यात्री ट्रेनों के पहियों के उत्पादन की रफ्तार को पकड़ लिया है और अब कारखाना में बड़ी संख्या में ऐसे पहिये बनाए जा रहे हैं. पहियों के सफलतम निर्माण का नतीजा है कि कारखाना में निर्मित यात्री ट्रेनों के निर्मित पहिये की पहली खेप शुक्रवार को रवाना होगी.
बुजुर्ग स्टाफ हरी झंडी दिखाकर करेंगे रवाना : कारखाना से यात्री ट्रेनों के चक्कों की पहली खेप शुक्रवार को सवारी डिब्बा मरम्मत कारखाना हरनौत(बिहार) भेजी जायेगी. जिसे कारखाना के सबसे पुराने स्टाफ हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे. लगभग दस ट्रको पर सवार चक्के को दिन के दो बजे रवाना किया जायेगा.
यात्री ट्रेनों के 10 हजार पहिये बनाने का मिला है लक्ष्य : कारखाना में मई में यात्री ट्रेनों के पहिये बनने का ट्रायल शुरू हुआ. फिर उत्पादन के रफ़्तार पकड़ने में लगभग तीन महीने का वक़्त लग गया. सितम्बर से पहिये उत्पादन की रफ्तार पकड़ी. इस माह में 2242 चक्के ढाले गए. वहीं 19 अक्तूबर 16 तक 1443 चक्के ढाले जा चुके हैं. इस तरह अब तक 3685 पहिये ढाले गए हैं.
मालगाड़ी से हल्का और छोटा होता है यात्री ट्रेनों का पहिया : मालगाड़ी, यात्री ट्रेनों की तुलना में ज्यादा वजन ढोता है. इसलिए दोनों ट्रेनों के पहियों की बनावट, माप, भार व रसायन में अंतर होता है. एक तरह जहां मालगाड़ी के पहिये का वजन 484 किलो, व्यास 1000 एमएम व कार्बन की मात्रा 0.55-0.70 प्रतिशत होती है. जबकि यात्री ट्रेन के पहिये का भार 384 किलो, व्यास 920 एमएम व कार्बन की मात्रा 0.45-0.60 प्रतिशत होता है. मालगाड़ी के पहियों को ज्यादे मजबूत बनाने के लिए उसमें कार्बन का प्रयोग यात्री ट्रेनों के पहियों से ज्यादा होता है.
24 मई 2016 को यात्री ट्रेनों के पहियों का ट्रायल : पहिया कारखाना में उत्पादन शुरू होने के बाद उसमें मालगाड़ी के प
हियों का निर्माण होता था. मगर रेलवे बोर्ड की सहमति मिलने के बाद इसी साल 24 मई 2016 को कारखाना में पहली बार यात्री ट्रेनों के पहियों के निर्माण का ट्रायल शुरू किया. जो सफल रहा. उसके बाद से कारखाना प्रशासन संसाधनों का जुगाड़ कर यात्री ट्रेनों के पहियों का तेजी से निर्माण कर रहा है.
लगभग 22 हजार 500 चक्कों के उत्पादन का मिला है लक्ष्य : रेलवे बोर्ड की ओर से कारखाना प्रशासन को इस वित्तीय वर्ष (2016-17) में उत्पादन का जो लक्ष्य मिला है उसके अनुसार कारखाना को इस वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक मालगाड़ी के 12 हजार 500 पहिये और यात्री ट्रेनों के 10 हजार पहियों का निर्माण करना है.
आज रवाना होगी यात्री ट्रेनों के पहियों की पहली खेप
कारखाने में निर्मित चक्का.
क्या कहते हैं पदाधिकारी
पहली बार रेल कारखाने से यात्री ट्रेनों के तैयार पहिये हरनौत भेजे जायेगे. इस उपलब्धि को पाने में कारखाना के सभी 32 पदाधिकारियों व साढ़े नौ सौ स्टाफ ने कड़ी मेहनत की है. सही मायनों में यह गर्व की बात है. इस उपलब्धि पर इतराने का मौका मिला है.
उग्रसेन, मुख्य जनसम्पर्क पदाधिकारी, रेल पहिया कारखाना, बेला, दरियापुर, सारण

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