विरोविरोदधरनाका ने शुरू किया आमरण अनशन
प्रदर्शन. जेपीविवि कर्मियों का आमरण अनशन प्रारंभ
हो गया मांगे पूरी नहीं होने पर संघर्ष को तेज करने का किया एलान
छपरा : जेपीविवि कर्मियों का आमरण अनशन प्रारंभ हो गया. अपनी दो सूत्री मांगों को लेकर बुधवार से विवि के कर्मचारी आमरण अनशन पर चले गये. ज्ञातव्य हो कि पूर्ववत वेतन भुगतान तथा विवि कर्मियों के नियमविरुद्ध तरीके से महाविद्यालय कैडर में किये गये स्थानांतरण को वापस लेने की मांग को लेकर विवि कर्मी विगत 19 सितंबर से अनिश्चितकालीन धरना पर हैं.
धरना पर बैठे कर्मचारी नेताओं ने कहा कि विवि प्रशासन हठधर्मिता की नीति अपना रहा है. विवि प्रशासन द्वारा खुद ही समझौता पत्र तैयार किया गया था जिसपर अगले दिन हस्ताक्षर होना था किन्तु रातोरात उस समझौता पत्र में फेरबदल कर दिया गया. उन्होंने कहा कि विवि प्रशासन कर्मियों को डरा धमका कर हड़ताल को खत्म कराने की कोशिश कर रहा है पर कर्मचारी डरने वाले नहीं. अपनी वाजिब मांगों के लिए वे संघर्ष करते रहेंगे. अनशन पर बैठने वालों में संघ के सचिव डॉ सत्येंद्र कुमार सिंह, कार्यालय सचिव रंजय कुमार सिंह, डॉ समरजीत कुमार सिन्हा, शत्रुघ्न राम, मुन्ना कुमार, रियाजुद्दीन अंसारी शामिल हैं.
इस अवसर पर बिहार राज्य अराजत्रित कर्मचारी महासंघ गोप गुट के जिलाध्यक्ष अशोक सिंह, जेपी विवि पीजी शिक्षक संघ के सचिव डॉ रणजीत कुमार सिंह, कर्मचारी संघ के अध्यक्ष राजेश कुमार पांडेय, डॉ विद्याभूषण श्रीवास्तव, विपिन कुमार सिंह, कामता शर्मा, अखिलेश त्रिपाठी, प्रमोद कुमार, पारस राय, पंकज कुमार सिंह सहित सभी विवि कर्मचारी उपस्थित थे.
काम काज हो रहा है बाधित : विश्वविद्यालय कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने के कारण काम काज प्रभावित हो रहा है. विभागीय आदेशों, निर्देशों से संबंधित संचिकाओं का निष्पादन नहीं हो रहा है.
सेवानिवृत कर्मचारियों के पेंशन भुगतान से संबंधित मामले लंबित पड़े है. परीक्षा फल के प्रकाशन भी अवरूद्ध है. महत्वपूर्ण कार्यों का निष्पादन नहीं हो रहा है. विश्वविद्यालय के विभिन्न समितियों की बैठके भी लंबे समय से नहीं हो रही है. विकास संबंधी कार्यों के संचिकाओं के निष्पादन पर भी ग्रहण लगा हुआ है. पिछले वर्ष घोषित स्नातक अंतिम वर्ष और इस वर्ष घोषित स्नातक अंतिम वर्ष व द्वितीय वर्ष के परीक्षा परिणाम में त्रुटियों को नहीं सुधारा जा रहा है. इसको लेकर प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में छात्र कॉलेज व विश्वविद्यालय का चक्कर लगाने को विवश है.
धरना पर बैठे विश्वविद्यालय कर्मचारी.
