प्रभात किरण/अमन
बांका और सारण के बाद अफ्रीकी देशों के स्कूलों में अपनाया जायेगा इकोवेशन एप
छपरा : कहते हैं जब मन में समाज के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो मुश्किल परिस्थितियां भी प्रगति के नये रास्ते खोल देती हैं. छपरा के होनहार छात्र रितेश ने भी अपनी प्रतिभा के बल पर शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने का प्रयास शुरू किया है.
रितेश ने इकोवेशन नामक एक एप बनाया है, जो छात्रों को डिजिटल तकनीक से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने में सहायक साबित हो रहा है. यह एप इतना कारगर है कि बिहार के दो जिलों सारण और बांका में इसके जरिये माध्यमिक स्कूलों में उन्नयन कार्यक्रम चला कर 10वीं के छात्रों को उपयोगी शिक्षा दी जा रही है.
इकोवेशन एप की सफलता से प्रभावित होकर हाल ही में रितेश को संयुक्त राष्ट्र के एक विशेष समारोह में बुलाया गया, जहां सम्मानित करने के साथ ही अफ्रीका के भी कई देशो में इसे शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया. जल्द ही यह एप अफ्रीकी देशों के छात्रों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने में अपनी प्रभावी भूमिका निभायेगा. केन्या, नाइजीरिया और कांगो ऐसे कुछ देश हैं, जो प्रथम चरण में इसकी शुरुआत करेंगे.
पढ़ने में कमजोर बच्चों को देख मन में आया था एप बनाने का विचार
छपरा शहर के रहने वाले रितेश सिंह ने 2012 में आइआइटी,दिल्ली से बीटेक किया. जब वह 10वीं में थे तब उनके पिता का देहांत हो गया. इस समय रितेश का मन भी पढ़ने में नहीं लगता था. किताबी भाषा उन्हें जल्दी समझ में नहीं आती थी.
पिता के नहीं रहने के बाद उन्होंने यह तय किया कि अब पढ़-लिखकर ही कुछ अच्छा करना है. उन्होंने आगे की पढ़ाई जारी रखी. इसी बीच उनके मन में पढ़ने में कमजोर बच्चों के लिए एक एप बनाने का विचार आया, जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा आसानी से प्रसारित की जा सके. मध्यमवर्गीय परिवार से होने के कारण एप बनाने में आने वाले खर्च को जुटाना भी इनके लिए एक चुनौती ही थी. हालांकि, दिल्ली में रहने वाले छपरा शहर के कुछ दोस्तों के सहयोग से उन्होंने एप बनाने में सफलता प्राप्त कर ली.
आइआइटी के छात्र रहे रितेश ने बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के उद्देश्य से बनाया है एप
क्या है इकोवेशन एप
इकोवेशन एप के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीक का इस्तेमाल कर बच्चों को शिक्षा दी जा रही है. यह अपने आप में अनोखा एप है. स्कूल में स्मार्ट टीवी पर तो घर में इकोवेशन एप जरिये शिक्षा को बेहतर ढंग से पहुंचाया जा रहा है.
एप बताता है कि क्या पढ़ने से और कैसे पढ़ने से आपको अच्छे अंक आयेंगे और प्रतियोगी परीक्षाओं में कैसे सफल होंगे. यही नहीं, विदेश के भी कई एक्सपर्ट जुड़ कर एप के लिए अपना समय निकाल रहे हैं. ये एक्सपर्ट बच्चों के सवाल का जवाब दे रहे हैं. इस एप में अलग-अलग लर्निंग ग्रुप्स हैं, जिनमें छात्र अपने विषय चुन कर पढ़ सकते हैं. इन छात्रों को दिल्ली से विशेष टीम मॉनीटर करती है.
सीएम ने की थी तारीफ, पूरे राज्य में लागू करने को कहा था
बांका के डीएम कुंदन कुमार ने इस एप के बारे में कहीं इंटरनेट पर पढ़ा और रितेश को बुलाकर इसके बारे में समझा और फिर माध्यमिक स्कूलों में इसके जरिये पढ़ाई शुरू करायी. यह प्रयोग सफल रहा और 2017 में बिहार बोर्ड की मैट्रिक परीक्षा में बांका जिले के परीक्षार्थियों की सफलता का प्रतिशत 38 से बढ़कर 71 हो गया. बिहार के टॉप 20 विद्यार्थियों में तीन बांका से ही थे़
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी इस प्रयोग की तारीफ की थी और इसे पूरे राज्य में लागू करने की बात कही थी. बांका की सफलता से प्रभावित होकर सारण में भी वर्तमान में लगभग 100 स्कूलों में इकोवेशन एप के माध्यम से स्मार्ट क्लास संचालित किये जा रहे हैं.
