Samastipur News:विद्यालय का वीडियो समृद्धि योजना के तहत राज्य स्तर के लिए चयनित

उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय, बेला पंचरुखी ने साबित किया है कि कला में भागीदारी गणित, पठन, संज्ञानात्मक क्षमता, आलोचनात्मक चिंतन और मौखिक कौशल में वृद्धि से जुड़ी है.

Samastipur News:समस्तीपुर: उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय, बेला पंचरुखी ने साबित किया है कि कला में भागीदारी गणित, पठन, संज्ञानात्मक क्षमता, आलोचनात्मक चिंतन और मौखिक कौशल में वृद्धि से जुड़ी है. कला सीखने से प्रेरणा, एकाग्रता, आत्मविश्वास और टीम वर्क में भी सुधार हो सकता है. इस विद्यालय का वीडियो “कला समृद्धि योजना ” के अंतर्गत जिले स्तर पर चयनित होकर राज्य स्तर पर भेजा गया है. विद्यालय में छात्रों द्वारा कला, संस्कृति और शिक्षा के समन्वय से बनाया गया रचनात्मक कार्यों को प्रदर्शित करता है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप कला-सम्मिलित शिक्षण पद्धति को प्रोत्साहित करता है. डीईओ कामेश्वर प्रसाद गुप्ता ने कहा कि स्कूल में हर स्तर पर, कला के विविध माध्यम और स्वरूप बच्चों को खेल-खेल में तथा विषयबद्ध रूप में विकसित होने में मदद करते हैं, उन्हें अभिव्यक्ति के कई रास्ते सिखाते हैं. संगीत, नृत्य और नाटक विद्यार्थियों के आत्मबोध उनके ज्ञानात्मक और सामाजिक विकास में सहायक होते हैं. पूर्व प्राथमिक और प्राथमिक स्तरों पर ये सभी कलाएँ बेहद महत्त्वपूर्ण हैं. साथ ही कला शिक्षा पर शिक्षकों को अधिक संसाधनात्मक सामग्री दी जाए. शिक्षक-प्रशिक्षण और अभिमुखीकरण में ऐसे महत्वपूर्ण अवयव होने चाहिए ताकि शिक्षक दक्षता से और रचनात्मक ढंग से कला का शिक्षण कर सकें. समृद्धि योजना का उद्देश्य विद्यार्थियों में कला के माध्यम से सीखने की प्रक्रिया को सशक्त बनाना, स्थानीय कला एवं परंपराओं को विद्यालयी शिक्षा से जोड़ना और शिक्षण को जोड़ रचनात्मक बनाना है. विद्यालय के शिक्षक मंगलेश कुमार ने बताया कि हमारे विद्यालय के बच्चों ने स्थानीय वास्तुकला और पारंपरिक कला को आधुनिक शिक्षा से जोड़कर एक प्रेरणादायक प्रस्तुति तैयार की है. समृद्धि योजना के तहत राज्य स्तर पर चयन के बाद यह वीडियो और राष्ट्रीय स्तर पर भी भेजा जाएगा. अब यह अन्य विद्यालय के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगा. कला शिक्षा की स्वरूप ऐसा ही होना चाहिये जिससे कि उसका आस्वादन करने वाले विद्यार्थी समाज में फैल कर दूसरों को भी उसका उसी प्रकार आस्वादन करा सकें और आज की सामाजिक चेतना के स्वरूप को लोगों के सम्मुख भली-भांति स्पष्ट कर सकें.

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