Samastipur News:कम समय में धान की उपज के प्रभेद चयन की जरूरत : डा निलांजय

डॉ राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा की तरफ से किसानों के लिए धान की खेती को लेकर सलाह जारी किया गया है.

Samastipur News: पूसा : डॉ राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा की तरफ से किसानों के लिए धान की खेती को लेकर सलाह जारी किया गया है. विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने कुछ ऐसे प्रभेद का विकास किया है जो कम समय में तैयार हो जाता है. उपज भी अच्छी होती है. विश्वविद्यालय के धान वैज्ञानिक निलांजय ने बताया कि समस्तीपुर और आसपास के जिलों के लिए विश्वविद्यालय द्वारा विकसित राजेंद्र भगवती, राजेन्द्र सरस्वती, राजेन्द्र नीलम और प्रभात किस्में सबसे उपयुक्त हैं. राजेंद्र नीलम किस्म 110 दिन में तैयार होती है. इसमें 35 से 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की उपज संभव है. राजेंद्र नीलम का चूरा काफी प्रचलित है. राजेंद्र भगवती और राजेंद्र सरस्वती प्रभेद से तैयार चावल खाने में काफी स्वादिष्ट लगता है और हल्का सुगंधित होता है. यह किस्म 110 से 115 दिन में पक कर तैयार होती है. दोनों प्रभेद कम पानी और कम लागत में बेहतर उत्पादन देते हैं. डॉ निलांजय के मुताबिक यह सभी किस्में कम पानी और कम खर्चे में अच्छी उपज देने वाली सक्षम किस्म है. खास बात यह है कि इन्हें सीधी बुवाई के साथ-साथ ट्रांसप्लांट करके भी लगाया जा सकता है. बुवाई का सही समय वैज्ञानिक के अनुसार यदि किसान भाई रोपने के लिए नर्सरी बनाना चाहते हैं तो उपरोक्त किस्म का 10 जून से 25 जून के बीच बिचड़ा गिरा सकते हैं. इसके 22 से 25 दिन बाद बिचडा को उखाड़ कर खेत में रोप सकते हैं. वहीं यदि कोई किसान सीधी बुवाई करना चाहते हैं तो 20 जून तक कर सकते हैं. कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि किसान भाई गुणवत्तापूर्ण चावल के लिए विश्वविद्यालय की किस्म राजेंद्र कस्तूरी राजेंद्र, सुभाषिनी, राजेंद्र श्वेता सुगंध आदि भी लगा सकते हैं.

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Published by: Ankur kumar

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