Samastipur News:समस्तीपुर : इसे वन विभाग और बिजली कंपनी के बीच सामंजस्य का अभाव कहें या कुछ और. जिस तरह से सड़क के किनारे वन विभाग के द्वारा लगाये गये वृक्षों को बिजली कंपनी विद्युत प्रवाह में व्यवधान का कारण मानते हुए काटने में जुटी है. उससे लोगों में तरह-तरह की चर्चा हो रही है. पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से सड़क के किनारे मनरेगा व अन्य योजनाओं के तहत पेड़ लगाये गये हैं. इसी सड़क के किनारे से बिजली के पोल भी लगे हैं. जिससे बिजली की तार गुजरती है. कई स्थानों पर बिजली की तार पेड़ों की टहनियों के संपर्क में भी आ चुकी है. जिसके संभावित खतरे को देखते हुए विद्युत कंपनी के अभियंता के आदेश पर मानव बल इन वृक्षों को काटने का कार्य कर रहे हैं. स्थानीय लोग निर्बाध बिजली चाहते जरूर हैं लेकिन इसके नाम पर पेड़ों व उसकी टहनियों की कटाई को भी लोग उचित नहीं मान रहे हैं. लोगों का कहना है कि यदि वन विभाग और बिजली कंपनी के अधिकारी पहले ही सामंजस्य स्थापित किए हुए होते तो वृक्षारोपण विद्युत संचरण वाले क्षेत्र से दूरी बनाकर की गई होती और आज न तो पेड़ों के कारण विद्युत के प्रवाह में समस्या आती और नहीं इन पेड़ों की कटाई की जाती. दोनों विभाग सरकार के तंत्र हैं. ऐसे में बुद्धिजीवियों का यह भी मानना है कि आगे से वृक्षारोपण करते समय विद्युत कंपनी के लोगों से भी परामर्श लेनी चाहिए कि भविष्य में इन पेड़ों के बड़े होने पर बिजली बहाल की दिशा में कोई समस्या तो नहीं आयेगी. यदि पहले से योजनाबद्ध कार्य किए जाते तो आज पेड़ों की कटाई की नौबत नहीं आती. इससे इतर जितिया पर्व करने वाली महिलाएं भी बिजली कंपनी द्वारा मेंटेनेंस के नाम पर घंटों बिजली सप्लाई प्रभावित करने पर कोस रहे थे.
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