समस्तीपुर से प्रकाश कुमार की रिपोर्ट
Teacher Deputation Cancel: उच्च शिक्षा विभाग ने 23 जून 2026 को एक आदेश जारी कर जिलों से यूजीसी मानकों के अनुरूप नेट, जेआरएफ या पीएचडी योग्यताधारी सरकारी शिक्षकों की सूची मांगी थी. योजना थी कि इन शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति पांच नवस्थापित राजकीय डिग्री कॉलेजों में की जाएगी, ताकि नए शैक्षणिक सत्र की पढ़ाई समय पर शुरू हो सके.
अचानक रद्द कर दिया गया आदेश
अब उच्च शिक्षा विभाग के निदेशक प्रो. (डॉ.) एन.के. अग्रवाल ने नया आदेश जारी कर पहले के निर्देश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है. विभाग ने पत्र में केवल “अपरिहार्य कारणों” का हवाला दिया है. हालांकि आदेश रद्द करने के पीछे की कोई स्पष्ट वजह नहीं बताई गई है, जिससे कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं.
क्यों बदला फैसला?
सूत्रों के अनुसार, यदि स्कूलों में कार्यरत नेट, जेआरएफ और पीएचडी योग्यताधारी शिक्षकों को कॉलेजों में भेजा जाता, तो स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका थी. माना जा रहा है कि इसी वजह से विभाग को अपना फैसला वापस लेना पड़ा. हालांकि इस संबंध में विभाग की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.
छात्रों और अभिभावकों की बढ़ी चिंता
फैसला बदलने के बाद अभिभावकों और शिक्षाविदों ने चिंता जताई है. उनका कहना है कि योग्य शिक्षकों की तैनाती से नए कॉलेजों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की शुरुआत होती, लेकिन लगातार बदलते फैसलों से छात्रों के भविष्य पर अनिश्चितता बढ़ रही है.
अब क्या होगा आगे?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि नए डिग्री कॉलेजों में शिक्षकों की कमी कैसे पूरी होगी. क्या सरकार अतिथि प्राध्यापकों की नियुक्ति करेगी या फिर बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) के माध्यम से नियमित बहाली की प्रक्रिया तेज होगी? फिलहाल इस पर विभाग की ओर से कोई नई घोषणा नहीं की गई है. ऐसे में समस्तीपुर के पांच नए राजकीय महाविद्यालयों में दाखिला लेने वाले हजारों छात्रों की पढ़ाई को लेकर संशय बना हुआ है.
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